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श्री भैरव आरती -लाभ, विशेष अवसर और कब पाठ करें

শ্রী শাশ্বত এস.|মঙ্গলবার - ১৪ মে, ২০২৪|2 min read

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""बटुक भैरव आरती" भगवान बटुक भैरव को समर्पित एक भजन है, जो भगवान शिव के भयानक स्वरूप को स्तुति करता है। यह आरती पूजा अनुष्ठानों के दौरान गाई जाती है ताकि भगवान बटुक भैरव की कृपा और संरक्षण का आशीर्वाद प्राप्त हो सके।

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आरती

॥ श्री भैरव आरती ॥
जय भैरव देवा प्रभुजय भैरव देवा,

सुर नर मुनि सबकरते प्रभु तुम्हरी सेवा॥

ऊँ जय भैरव देवा...॥

तुम पाप उद्धारकदु:ख सिन्धु तारक,

भक्तों के सुखकारकभीषण वपु धारक॥

ऊँ जय भैरव देवा...॥

वाहन श्वान विराजतकर त्रिशूल धारी,

महिमा अमित तुम्हारीजय जय भयहारी॥

ऊँ जय भैरव देवा...॥

तुम बिन शिव सेवासफल नहीं होवे,

चतुर्वतिका दीपकदर्शन दुःख खोवे॥

ऊँ जय भैरव देवा...॥

तेल चटकि दधि मिश्रितभाषावलि तेरी,

कृपा कीजिये भैरवकरिये नहिं देरी॥

ऊँ जय भैरव देवा...॥

पाँवों घूंघरू बाजतडमरू डमकावत,

बटुकनाथ बन बालकजन मन हरषावत॥

ऊँ जय भैरव देवा...॥

बटुकनाथ की आरतीजो कोई जन गावे,

कहे धरणीधर वह नरमन वांछित फल पावे॥

ऊँ जय भैरव देवा...॥

लाभ

1. संरक्षा: यह आरती भगवान बटुक भैरव की कृपा को प्राप्त करने में मदद करती है और भक्तों को नकारात्मक प्रभावों, बुरी आत्माओं और खतरों से संरक्षित करती है।

2. अवरोधों का निवारण: बटुक भैरव की कृपा की प्रार्थना करके भक्तों को अवरोधों और चुनौतियों से निपटने में सहायक होती है।

3. इच्छाओं की पूर्ति: आरती का गान और निष्ठापूर्वक प्रार्थना भक्तों के इच्छाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने में सहायक हो सकता है।

4. आध्यात्मिक विकास: आरती का पाठ आध्यात्मिक विकास और आंतरिक परिवर्तन के लिए सहायक होता है, दिव्य संबंध को गहराता है।

5. भय का नाश: बटुक भैरव डर के साथ जुड़े हैं, और आरती का पाठ वीरता को बढ़ावा देने और भक्तों के दिलों से भय को दूर करने में मदद करता है।

अंतर्वार्ता के रूप में, बटुक भैरव आरती को देवी और उनके आशीर्वाद को आमंत्रित करने और उनकी कृपा को प्राप्त करने का अद्भुत माध्यम माना जाता है।

विशेष अवसर और कब गाएं :

बटुक भैरव आरती को निम्नलिखित समयों में गाया जा सकता है:

1. सुबह के समय: प्रातःकाल में बटुक भैरव आरती का पाठ करना अधिक शुभ माना जाता है। यह दिन की शुरुआत को पवित्र और सकारात्मक बनाने में मदद करता है।

2. संध्या का समय: संध्या काल में भी बटुक भैरव आरती का पाठ किया जा सकता है, जो दिन को समाप्त करते समय भगवान की कृपा को प्राप्त करने में मदद कर सकता है।

3. पूजा के अवसरों पर: बटुक भैरव के पूजन अवसरों पर भी आरती का गान किया जा सकता है, जैसे कि महाशिवरात्रि या बटुक भैरव जयंती।

ये समय बटुक भैरव आरती का पाठ करने के लिए सबसे अनुकूल माने जाते हैं, लेकिन इसे किसी भी समय में भक्ति और निष्ठा के साथ गाया जा सकता है।



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