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Dev Deepabali 2023 देव दीपावली: कथा, महत्व, शुभ मुहूर्त और विधि

Shri Saswata S.|Tue - Nov 21, 2023|4 min read

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Dev Deepabali 2023 देव दीपावली: कथा, महत्व, शुभ मुहूर्त और विधि - Utsav App

देव दीपावली: प्रकाश का महापर्व

देव दीपावली का त्योहार कार्तिक माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता हैं। इस साल देव दीपावली २६ नवंबर को हर्षोल्लास से मनाई जाएगी। इसे गंगा दीपावली भी कहा जाता हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि देव दीपावली क्यों और कैसे मनाई जाती हैं? क्या हैं इसके पीछे की कथा? आइये जानते हैं - 

देव दीपावली की कथा

श्री हरि विष्णु चार महीने निद्रा में लीन रहते हैं इसलिए उनकी अराधना मॉं लक्ष्मी के साथ कार्तिक अमावस्या पर नहीं की जाती हैं। उनकी निद्रा खुलने के पश्चात मॉं लक्ष्मी के साथ उनकी अराधना कार्तिक पूर्णिमा पर की जाती हैं जिसे देव दीपावली कहा जाता हैं।

कई और कथाएँ भी प्रचलित हैं, पौराणिक कथाओं के अनुसार 

इस दिन महादेव ने त्रिपुरासुर नाम के एक रा़क्षस का अंत किया था।
त्रिपुरासुर ने बहुत आतंक फैलाया था और सभी जीव उसके आतंक से परेशान थें। तभी सभी देवताओं ने महादेव से उसके वध के लिए विनती की। महादेव ने कार्तिक पूर्णिमा के दिन त्रिपुरासुर का अंत किया।तब सभी देवताओं नें अपनी प्रसन्नता प्रकट करने के लिए उन्होंने स्वर्ग में दीपक प्रज्वलित किए फिर महादेव की नगरी काशी में भी गंगा घाट पर दीप प्रज्वलित किए और दीपावली मनाई। तब से ही कार्तिक पूर्णिमा पर देव दीपावली मनाई जाती हैं। इसे त्रिपुरोत्सव और त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता हैं।

एक और कथा को माना जाए तो इस दिन महादेव ने माँ गंगा को अपने जटा में समाहित किया था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मॉं गंगा देव नदी हैं और भगीरथ की कठोर तपस्या से मॉं गंगा धरती लोक पर अवतरित हुई लेकिन उनकी तेज़ धारा के कारण देव लोक से सीधे धरती पर आना संभव नहीं था क्योंकि उनका बहाव धरती सहन नहीं कर पाएगी और वो धरती को चीरती हुई पाताल लोक चली जाएगी फिर उन्होंने ब्रह्म जी से अपनी समस्या बताई और उन्होंने महादेव को प्रसन्न करने को कहा। भगीरथ ने महादेव की कठोर तपस्या की। जब महादेव ने प्रसन्न होकर वरदान माँगने को कहा तब उन्होंने महादेव से याचना की। फिर महादेव नें मॉं गंगा को धरती पर अवतरित कराने के लिए अपनी जटाओं में धारण किया, लंबे समय तक वो महादेव की जटाओं में ही घुमती रही। फिर उनका वेग कम हुआ और वो धरती पर आ गई।
इस खास घटना की स्मृति में, श्रद्धालु गंगा घाटों पर लाखों दीपों का आकाश सजाते हैं।

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देव दीपावली का महत्व

कार्तिक पूर्णिमा का दिन अत्यंत शुभ माना जाता है, इस दिन देवी देवताओं का आशीर्वाद और कृपा प्राप्त करने के लिए आपको उनकी विधिवत रूप से पूजा करनी चाहिए। इस दिन स्नान, व्रत, दान और दीपदान का विशेष महत्व हैं। कार्तिक पूर्णिमा के दिन लक्ष्मी पूजन सुख समृद्धि के लिए किया जाता हैं। अन्य मान्यता के अनुसार इस दिन श्री हरि विष्णु जी ने मत्स्य अवतार लिया था।
देव दीपावली, जो अमावस्या के दिन मनाई जाती है, विशेष रूप से काशी (वाराणसी) में होती है। देव दीपावली के दिन, गंगा घाटों पर लाखों दीपों का आकाश में उत्सव होता है। लोग अपने घरों को भी दीपों से सजाते हैं और आराधना में लगे रहते हैं। धार्मिक आयोजनों, कथा-कहानियों और संगीत के साथ इस दिन को उत्साह और उमंग के साथ मनाते हैं।
देव दीपावली का आयोजन भक्ति और समर्पण का एक अद्वितीय उदाहरण है, जिससे हम सभी भक्तों को आत्मिक समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है।


दीपदान का महत्व

मान्यता के अनुसार, देव दीपावली के दिन समस्त देवतागण गंगा किनारे दीपावली मनाने आते हैं। माना जाता हैं इस दिन प्रदोष काल में दीपदान करनें से भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है, इस दिन दीप दान करने से शनि, राहु-केतु, यम के दुष्प्रभाव भी कम होते हैं। 

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कैसे करें दीपदान

देव दीपावली पर संध्या में प्रदोष काल में ११, २१, ५१, १०८ धी या तेल के आटे के दीये बनाये। फिर नदी किनारे जाएं और अपने ईष्ट देव का स्मरण करें। दीपक की कुमकुम, अक्षत, हल्दी और फूल से पूजन करें और उसें प्रज्वलित करने के पश्चात नदी में विसर्जित कर दें। 


देव दीपावली का शुभ मुहूर्त और विधि

कार्तिक पूर्णिमा तिथि का आरंभ २६ नवंबर को दोपहर ३ बजकर ०८ मिनट से हो रही है। इस तिथि का समापन २७ नवंबर को दोपहर २ बजकर ४५ मिनट पर हो रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार देव दिवाली २६ नवंबर को मनाई जानी चाहिए।
देव दीपावली का मुहूर्त २६ नवंबर शाम ०५ बजकर ०८ मिनट से ०७ बजकर ४७ मिनट तक रहेगा।
विधि- कार्तिक पूर्णिमा के दिन प्रातः काल में नदी में या फिर नहाने वाली बाल्टी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें. स्नान के पश्चात महादेव का पूजन करें अथवा शूभ मुहूर्त पर नदी या तालाब के किनारे जाएं. वहां पर महादेव का स्मरण करते हुए दीपदान करें। परंतु किसी कारणवश अगर आप नहीं जा सकते हैं तो पूजा स्थल पर या मंदिर में दीपदान करें।


उत्सव एप के साथ करें दीपदान

अगर आप भी दीपदान करना चाहते हैं और शनि, राहु-केतु, यम के दुष्प्रभाव को कम करना चाहते हैं लेकिन किसी कारणवश नदी के किनारे नहीं जा पा रहे हैं तो आप हमारे एप पर दीपदान की बुकिंग कर सकतें हैं। आज ही एप डाउनलोड करें या हमारी वेबसाइट विसिट करें। आप सभी को देव दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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