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श्री राम आरती - लाभ, विशेष अवसर और कब पाठ करें

सोम - 29 अप्रैल 2024

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"श्री राम और अधिक पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। चंद्र कृपालु भजुमन" आरती हिंदू भगवान विष्णु के सातवें अवतार भगवान राम को समर्पित एक भक्ति गीत है। यह आमतौर पर भक्तों द्वारा प्रार्थना अनुष्ठानों के दौरान गाया जाता है, खासकर शाम को। आरती भगवान राम के दिव्य गुणों और गुणों की महिमा करती है और उनके आशीर्वाद और सुरक्षा के लिए आभार व्यक्त करती है। इस आरती की सुखदायक धुन और हृदयस्पर्शी गीत भगवान राम के प्रति भक्ति और श्रद्धा की भावना पैदा करते हैं, जो उपासकों के बीच आध्यात्मिक उत्थान को प्रेरित करते हैं।

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आरती

श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भाव भय दारुणम्।
नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।।
कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्।
पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्।।
भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।
रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्।।
सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं।
आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणं।।
इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
मम ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्।।
मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों।
करुना निधान सुजान सिलू सनेहू जानत रावरो।।
एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली।
तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली।।
जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।
मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे।।
श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भाव भय दारुणम्।
नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।।

लाभ:

1. भगवान राम के प्रति भक्ति को प्रगाढ़ करता है।
2. एक सकारात्मक और शांत वातावरण बनाता है।
3. आंतरिक शांति और शांति को बढ़ावा देता है।
4. आध्यात्मिक सुरक्षा और आशीर्वाद प्रदान करता है।
5. सांस्कृतिक परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण करता है।
6. समुदाय और एकता की भावना को बढ़ावा देता है।
7. भगवान राम के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।
8. आध्यात्मिक विकास और सचेतनता को प्रेरित करता है।

विशेष अवसर और कब गाएं :

1. दैनिक पूजा: दैनिक पूजा अनुष्ठान के हिस्से के रूप में सुबह या शाम की प्रार्थना में शामिल है।

2. राम नवमी: भगवान राम के जन्मदिन उत्सव के दौरान मनाया जाता है, इसे बहुत भक्ति और उत्साह के साथ गाया जाता है।

3. राम जन्मभूमि पूजन: राम के जन्मस्थान से संबंधित समारोहों के दौरान, जैसे भूमि पूजन समारोह या मंदिर निर्माण।

4. रामायण पाठ: भगवान राम के सम्मान और समापन के तरीके के रूप में महाकाव्य रामायण की चर्चा या पाठ के बाद।

5. त्यौहार: भगवान राम को समर्पित त्यौहारों, जैसे दिवाली या अन्य राम-संबंधित उत्सवों के दौरान गाया जाता है।

6. व्यक्तिगत प्रार्थना: आशीर्वाद पाने और भक्ति व्यक्त करने के साधन के रूप में, प्रार्थना और ध्यान के व्यक्तिगत क्षणों के लिए चुना गया।

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