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वास्तु दोष निवारण पूजा: घर की नकारात्मक ऊर्जा हटाएं और समृद्धि लाएं

सोम - 12 मई 2025

3 मिनट पढ़ें

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भूमिका: पवित्र स्थान की शक्ति

घर सिर्फ चार दीवारें नहीं होता, वह एक जीवंत ऊर्जा क्षेत्र है जो आपके स्वास्थ्य, धन और खुशहाली को प्रभावित करता है। अगर घर में वास्तु दोष (यानी दिशा या तत्वों का असंतुलन) हो, तो वह तरक्की में रुकावट डाल सकता है, पारिवारिक झगड़े बढ़ा सकता है और दुर्भाग्य को बुलावा देता है।
वास्तु दोष निवारण पूजा एक प्राचीन वैदिक प्रक्रिया है जो:
घर में रुकी हुई नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है
पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश – इन पंचतत्वों को संतुलित करती है
सुख, समृद्धि और शांति को आमंत्रित करती है
बिना किसी तोड़फोड़ के दिशा दोषों को सुधारती है

इस गाइड में आप जानेंगे:

कब और क्यों करनी चाहिए यह पूजा
पूजा की पूरी विधि और मंत्र
आम वास्तु दोषों के प्रभावी उपाय

वास्तु दोष निवारण पूजा: घर की नकारात्मक ऊर्जा हटाएं और समृद्धि लाएं - Utsav App

ये 5 संकेत बताते हैं कि आपको वास्तु दोष निवारण पूजा की जरूरत है:

1️. बिना कारण लगातार बीमार रहना
2️. मेहनत के बावजूद पैसों का नुकसान
3️. परिवार में बेवजह के झगड़े
4️. करियर या रिश्तों में ठहराव
5️. घर में अजीब सी आवाज़ें, बुरे सपने या डरावना माहौल

पूजा की तैयारी कैसे करें?

सबसे अच्छा समय

दिन: गुरुवार (गुरु का दिन – ज्ञान के लिए) या रविवार (सूर्य का दिन – ऊर्जा के लिए)
मुहूर्त: अभिजीत (सुबह 11:30 से दोपहर 12:30) या अमृत काल (सुबह जल्दी)

ज़रूरी सामान

कलश (तांबे का लोटा, नारियल के साथ)
गंगाजल, हल्दी, कुमकुम, अक्षत (चावल)
नवग्रह समिधा (9 पवित्र लकड़ियाँ)
वास्तु यंत्र (घर की ऊर्जा ग्रिड)
काले तिल (राहु-केतु दोष के लिए)

वास्तु दोष निवारण पूजा की विधि – स्टेप बाय स्टेप

1. शुद्धिकरण (Purification)
गंगाजल + सेंधा नमक मिलाकर घर के हर कोने में छिड़कें
धूप (लोबान) जलाएं – इससे वातावरण शुद्ध होता है
2. कलश स्थापना (Energy Anchor)
घर के मध्य भाग (ब्रह्मस्थान) में तांबे का कलश रखे
उसमें पानी, आम के पत्ते और नारियल रखें
3. वास्तु मंत्र जाप
“ॐ वास्तुपुरुषाय नमः” मंत्र 108 बार जपें
वास्तु शांति मंत्र बोलें:
“ॐ दिशं बंधायामि, खं बंधायामि, पृथ्वी बंधायामि”
(मैं दिशाओं, आकाश और पृथ्वी को समरसता में बाँधता हूँ)
4. नवग्रह पूजा (ग्रहों का संतुलन)
हर दिशा को उसका प्रतीक रंग और अन्न अर्पित करें:
पूरब (सूर्य) – गेहूं
उत्तर-पूर्व (गुरु) – हल्दी
दक्षिण (मंगल) – मसूर की दाल
5. दशा दिक्पाल पूजा (दिशा के रक्षक देवताओं की पूजा)
इन 10 दिशाओं के रक्षकों की पूजा करें, खासकर
कुबेर (उत्तर – धन का देवता)
अग्नि (दक्षिण-पूर्व – अग्नि तत्व का प्रतिनिधि)
6. होम (हवन)
देसी घी, कपूर और चंदन की लकड़ी से अग्नि में आहुति दें
मंत्र बोलें:
“ॐ सर्व वास्तु दोष निवारणाय स्वाहा”
7. वास्तु यंत्र की स्थापना
उत्तर-पूर्व दिशा में वास्तु यंत्र स्थापित करें – यह लगातार ऊर्जा सुधार करता है

बिना तोड़फोड़ के 5 असरदार वास्तु उपाय

मुख्य दरवाजा अवरुद्ध है?
– दरवाजे पर स्वस्तिक और ॐ का चिन्ह लगाएं
रसोई दक्षिण-पूर्व में है?
– चूल्हे के पास एक पिरामिड या चांदी का सिक्का रखें
शौचालय उत्तर-पूर्व में है?
– वहां सफेद मोमबत्ती और नमक का कटोरा रखें
बिस्तर बीम के नीचे है?
– बीम पर हल्दी से रँगा हुआ पीला कपड़ा बांधें
शीशा बिस्तर की ओर है?
– रात को उसे ढक दें या लक्ष्मी यंत्र पास रखें

वैज्ञानिक और आध्यात्मिक फायदे

विज्ञान: नमक और तांबा विद्युत चुम्बकीय तनाव को कम करते हैं
आध्यात्म: मंत्र घर की ऊर्जा को रीप्रोग्राम करते हैं – सकारात्मकता बढ़ती है

असली जीवन की बदलती कहानियां

 केस 1: पश्चिम दिशा (शनि का क्षेत्र) में सुधार के बाद एक परिवार में झगड़े बंद हो गए
केस 2: एक बिज़नेसमैन ने उत्तर-पूर्व (कुबेर का कोना) ठीक करने के बाद आर्थिक घाटा पूरा किया

निष्कर्ष: घर – आपका मंदिर

जब घर वास्तु के अनुसार संतुलित होता है, तो वह स्वास्थ्य, समृद्धि और आनंद का प्रवेश द्वार बन जाता है। चाहे आप पूजा से या सरल उपायों से शुरुआत करें – जब घर की ऊर्जा संतुलित होती है, तो जीवन अपने आप बेहतर हो जाता है।

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