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क्या आप जानते हैं कि आख़िर क्यों शिवजी को इतने प्रिय है बेल पत्र

श्री सस्वता एस.|सोम - 22 जुल॰ 2024|3 मिनट पढ़ें

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बिल्व पत्र जिन्हे बेल पत्र भी कहा जाता है। बेल के फल के पत्ते होते है। बेल का शिव जी की पूजा में अत्यधिक महत्व होता है। बेल पत्र शिवजी को बहुत प्रिय होते है। कोई भी व्यक्ति अपनी मनोकामना पूरी करने के शिवजी को बेल पत्र चढ़ाकर उन्हे प्रसन्न कर सकता है। और अपने लिए मनचाहा आशिर्वाद प्राप्त कर सकता है। आज हम आपको बताऐंगे की शिव जी को बेल पत्र चढ़ाने से क्या लाभ होता है, उन्हे बेल पत्र क्यों प्रिय है, किस प्रकार का बेल पत्र अच्छा होता है।

विषय सूची

1. शिव जी को बेल पत्र क्यों प्रिय है?
2. बेल पत्र चढ़ाते समय निम्न मंत्रों का जप करना चाहिए
3. शिवलिंग पर बेल पत्र चढ़ाने के लाभ
4. शिव जी को बेल पत्र कैसे चढ़ाए?

क्या आप जानते हैं कि आख़िर क्यों शिवजी को इतने प्रिय है बेल पत्र - Utsav App

शिव जी को बेल क्यों प्रिय है?

इन पत्तियों को भगवान शिव का प्रिय क्यों माना जाता है, इसके कई कारण हैं:

पौराणिक उत्पत्ति: स्कंद पुराण के अनुसार, बिल्व वृक्ष देवी पार्वती के पसीने की बूंदों से उत्पन्न हुआ था, जिससे यह एक पवित्र पौधा बन गया और भगवान शिव से इसका गहरा संबंध है।
प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व: बिल्व पत्र की तीन-पालिदार आकृति हिंदू त्रिदेवों - ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर (शिव) का प्रतीक है। यह ईश्वर के तीन पहलुओं का प्रतिनिधित्व करता है।
शिव की तीन आँखों का प्रतीक: शास्त्रों के अनुसार, बिल्व पत्र की तीन पत्तियाँ भगवान शिव की तीन आँखों का भी प्रतिनिधित्व करती हैं - तीसरी आँख दिव्य ज्ञान और विनाश की आँख है।
भक्ति महत्व: भगवान शिव को बिल्व पत्र चढ़ाना पूर्ण समर्पण का संकेत माना जाता है, क्योंकि तीन पत्तियों द्वारा तमस, रजस और सत्व के तीन गुणों का प्रतिनिधित्व किया जाता है। यह अहंकार के नाश करने वाले के रूप में शिव की भूमिका के साथ संरेखित होता है।
औषधीय और चिकित्सीय लाभ: बिल्व फल और पत्तियों में कई आयुर्वेदिक औषधीय गुण होते हैं, जो उन्हें शुभ प्रसाद बनाते हैं। इनका उपयोग पाचन संबंधी समस्याओं, मधुमेह और त्वचा की समस्याओं जैसी कई बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है।

बेल पत्र चढ़ाते समय निम्न मंत्रों का जप करना चाहिए

"ॐ त्रिपुण्डराय नमः" - यह मंत्र बेल पत्र की तीन पत्तियों का प्रतीक है और शिव के तीन नेत्रों का प्रतीक है।
"ॐ नमः शिवाय" - यह मंत्र भगवान शिव को प्रणाम करता है और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए है।
"ॐ हरिहर-आत्मने नमः" - यह मंत्र शिव और विष्णु के एकीकरण का प्रतीक है, जो हिंदू त्रिमूर्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं। 

इन मंत्रों का जाप करते हुए बेल पत्र को शिवलिंग पर चढ़ाने से भक्त को शीघ्र ही भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और उनके आशीर्वाद मिलते हैं। 

शिवलिंग पर बेल पत्र चढ़ाने के लाभ

शिव जी को बेल पत्र प्रिय होने के कारण उन्हे बेल पत्र चढ़ाने से हमे कई लाभ मिलते है। शिव जी को बेल पत्र चढ़ाने से दैनिक जीवन की समस्याओं के साथ ही हमारी स्वास्थ्य सम्बन्धी बीमारियों भी दूर होती है। जिनमे से कुछ निम्न लिखित है:

1. दरिद्रता दूर होकर धन-धान्य में वृद्धि होती है।
2. महिलाओं को संतान प्राप्ति का लाभ मिलता है।
3. शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और सर्दी-खांसी जैसी समस्याएं दूर होती हैं।
4. दिल की बीमारी से ग्रस्त रोगी के स्वास्थ्य में सुधार होता है।

शिव जी को बेल पत्र कैसे चढ़ाए?

1. बेलपत्र तोड़ने और चढ़ाने के लिए चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या तिथियों को, संक्रांति के समय और सोमवार को नहीं तोड़ना चाहिए।
2. कम से कम तीन पत्ती वाला बेलपत्र चढ़ाना चाहिए। तीन से कम पत्ती वाला बेलपत्र नहीं चढ़ाना चाहिए।
3. पत्ते फटे और दाग भी नहीं होना चाहिए।
4. बेलपत्र को अनामिका, अंगूठे और मध्यमा उंगली की मदद से चढ़ाना चाहिए।
5. बेलपत्र के साथ शिवलिंग पर जल की धारा अवश्य होनी चाहिए। चढ़ाते समय ऊं नम: शिवाय मंत्र का जप करना चाहिए।
6. यदि पर्याप्त मात्रा में नया बेलपत्र नहीं मिल रहा है, तो शिवलिंग पर चढ़े हुए बेलपत्र को स्वच्छ जल से धोकर फिर से चढ़ाया जा सकता है। बेलपत्र के बहुत से पत्ते पर धारियां होती हैं, ऐसे बेलपत्र को शिवजी पर चढ़ाने के योग्य नहीं माना जाता है।

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