राम स्तुति पाठ – अर्थ, लाभ और सम्पूर्ण श्री राम स्तुति
शुक्र - 30 जन॰ 2026
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राम स्तुति भगवान श्रीराम जी को समर्पित एक अत्यंत पवित्र स्तोत्र है। जो साधक नियमित रूप से राम स्तुति का पाठ करता है, उसके घर, कार्यस्थल और व्यवसाय में निरंतर उन्नति होने लगती है। राम स्तुति का नियमित पाठ मन को शांत करता है और जीवन में सुख-शांति लाता है। यह स्तुति भगवान श्री हनुमान जी को भी अत्यंत प्रिय है।
ऐसा माना जाता है कि यदि श्री हनुमान जी की पूजा से पहले भगवान श्रीराम की स्तुति की जाए, तो हनुमान जी शीघ्र प्रसन्न होते हैं और साधक को अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं। इस प्रकार राम स्तुति का पाठ करने से श्रीराम और श्रीहनुमान दोनों की कृपा प्राप्त होती है।
विषय सूची
- श्री राम स्तुति (संस्कृत पाठ)
- अर्थ एवं प्रतीकात्मक महत्व
- राम स्तुति के पाठ के लाभ
- राम स्तुति का पाठ कौन करे

- श्री राम स्तुति (संस्कृत पाठ)
- श्री रामचंद्र कृपालु भज मन हरण भवभय दारुणम् । नव कंजलोचन कंजमुख करकंज पदकंजारुणम् ।।
कंदर्प अगणित अमित छवि नवनील नीरद सुन्दरम् । पट पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम ।।
भज दीनबंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम् ।
रघुनंद आनंद कंद कौसल चंद दशरथ नन्दनम् ।।
सिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदार अंग विभूषणम् ।
आजानु भुज शरचाप धर संग्रामजित खर दूषणम् ।।
इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम् ।
मम ह्रदय कंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम् ।।
मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों ।
करुना निधान सुजान सिलू सनेहू जानत रावरो ।।
एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली । तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली ।।
जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि ।
मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे ।।
।। इति श्री राम स्तुति सम्पूर्णम् ।।
अर्थ एवं प्रतीकात्मक महत्व
राम स्तुति एक विशेष स्तोत्र है, जिसके प्रत्येक शब्द और अक्षर में गूढ़, शक्तिशाली और रहस्यमय ऊर्जा निहित है। सही विधि और श्रद्धा से किया गया इसका पाठ विशेष फल प्रदान करता है। भगवान श्रीराम के परम भक्त श्रीहनुमान जी, केवल राम नाम के उच्चारण से ही प्रसन्न हो जाते हैं। इसलिए बजरंगबली की पूजा से पूर्व रघुनंदन श्रीराम की स्तुति करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
भगवान विष्णु ने रावण और अधर्म के विनाश के लिए श्रीराम के रूप में पृथ्वी पर अवतार लिया। हिंदू धर्म में भगवान श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तमकहा गया है, अर्थात् वे आदर्श मानव हैं, जिनमें मानवीय गुणों की सर्वोच्च अभिव्यक्ति दिखाई देती है। वे धर्म के रक्षक और पालनकर्ता हैं तथा भगवान विष्णु के प्रमुख अवतारों में से एक हैं।
कुछ राम-भक्ति परंपराओं में भगवान श्रीराम को केवल अवतार नहीं, बल्कि स्वयं परम ब्रह्म और सर्वोच्च ईश्वर माना गया है। वे सत्य, चेतना, करुणा और धर्म के सजीव स्वरूप हैं।
रामायण के आध्यात्मिक अर्थ में, भगवान राम आत्मा, परम चेतना, सत्य और शुभता के प्रतीक हैं। माता सीता उनकी शाश्वत अर्धांगिनी हैं, जो आदिशक्ति या कुंडलिनी शक्ति का प्रतीक मानी जाती हैं। यदि भगवान राम आदर्श पुरुष हैं, तो माता सीता आदर्श नारी का स्वरूप हैं।
राम स्तुति का प्रत्येक छंद किसी न किसी दिव्य गुण, शक्ति या देवत्व का वर्णन करता है। इन मंत्रों पर ध्यान करने से व्यक्ति को आत्मज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
राम स्तुति के पाठ के लाभ
प्रतिदिन लगभग पंद्रह मिनट तक श्रद्धा और ध्यान के साथ राम स्तुति का पाठ करने से अनेक लाभ प्राप्त होते हैं। यदि इसे श्वास-प्रश्वास (प्राणायाम) के साथ किया जाए, तो इसका प्रभाव और भी बढ़ जाता है।
राम स्तुति के प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:
- मानसिक तनाव कम होता है और मन शांत रहता है
- एकाग्रता, स्मरण शक्ति और ध्यान क्षमता में वृद्धि होती है
- शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है
- रचनात्मकता, कार्यक्षमता और व्यवसाय में उन्नति होती है
- ग्रह दोषों और नकारात्मक प्रभावों में कमी आती है
- पारिवारिक संबंध मधुर होते हैं और आपसी प्रेम बढ़ता है
- जीवन में शांति, संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है
राम स्तुति का पाठ कौन करे
जो भी व्यक्ति जीवन में सफलता, उन्नति, मानसिक शांति और शत्रुओं से रक्षा चाहता है, उसे नियमित रूप से राम स्तुति का पाठ अवश्य करना चाहिए। विद्यार्थी, गृहस्थ, व्यापारी, नौकरीपेशा व्यक्ति—सभी के लिए राम स्तुति अत्यंत लाभकारी है।
