चंद्र ग्रहण 2026: तिथि, समय, भारत में दृश्यता, क्या करें–क्या न करें
बुध - 18 फ़र॰ 2026
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वर्ष 2026 का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण 3 मार्च को घटित होगा, जिसे भारत में सामान्यतः चंद्र ग्रहण कहा जाता है। फरवरी में होने वाले सूर्य ग्रहण के बाद यह अगली महत्वपूर्ण खगोलीय घटना होगी, जो पृथ्वी के कई हिस्सों में दिखाई देगी।
विषय सूची
- चंद्र ग्रहण 2026 का संक्षिप्त विवरण
- चंद्र ग्रहण 2026 की तिथि और समय
- क्या 2026 का चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा?
- विश्व स्तर पर दृश्यता
- चंद्र ग्रहण 2026 के दौरान क्या करें और क्या न करें

चंद्र ग्रहण 2026 का संक्षिप्त विवरण
जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तो चंद्रमा गहरे लाल-नारंगी रंग का दिखाई देने लगता है। इस खगोलीय घटना को चंद्र ग्रहण कहा जाता है। नासा के अनुसार, यह संरेखण केवल पूर्णिमा के दिन ही संभव होता है।
चंद्र ग्रहण दो प्रकार के होते हैं— पूर्ण चंद्र ग्रहण और आंशिक चंद्र ग्रहण।
- जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की गहरी छाया (उम्ब्रा) में चला जाता है, तो उसे पूर्ण चंद्र ग्रहण कहा जाता है। इस दौरान चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देता है, इसलिए इसे ब्लड मून भी कहा जाता है।
- वहीं, जब चंद्रमा का केवल एक हिस्सा पृथ्वी की छाया में प्रवेश करता है, तो उसे आंशिक चंद्र ग्रहण कहा जाता है।
चंद्र ग्रहण 2026 की तिथि और समय
मंगलवार, 3 मार्च 2026 को वर्ष का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा। वर्ष का दूसरा चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 को होगा, जो आंशिक चंद्र ग्रहण होगा।
2026 में चंद्र ग्रहण का समय
समन्वित वैश्विक समय के अनुसार,
- आंशिक चरण सुबह 09:50 बजे शुरू होगा
- उपछाया चरण सुबह 08:44 बजे प्रारंभ होगा
- ग्रहण का चरम बिंदु 11:34 बजे होगा
- पूर्ण चंद्र ग्रहण 11:04 बजे से 12:02 बजे तक रहेगा
- पूरा ग्रहण 15:38 बजे समाप्त होगा
भारतीय मानक समय के अनुसार, यह चंद्र ग्रहण भारत में शाम 6:26 बजे चंद्रमा के उदय के समय दिखाई देगा। शाम 6:33 बजे से 6:40 बजे के बीच इसका सबसे स्पष्ट दृश्य देखने को मिलेगा और 6:46 बजे यह समाप्त हो जाएगा।
क्या 2026 का चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा?
हाँ। हालांकि पूर्णता का चरण पहले हो चुका होगा, इसलिए भारत में चंद्र ग्रहण का केवल आंशिक दृश्य ही दिखाई देगा, विशेष रूप से चंद्रमा के उदय के समय इसके अंतिम चरण।
विश्व स्तर पर दृश्यता
रात की दृश्यता के अनुसार, यह चंद्र ग्रहण प्रशांत महासागर, अटलांटिक महासागर, हिंद महासागर, आर्कटिक और अंटार्कटिक क्षेत्रों के साथ-साथ पूर्वी यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, उत्तर और दक्षिण अमेरिका में देखा जा सकेगा।
सबसे अच्छा दृश्य मध्य प्रशांत क्षेत्र, उत्तर-पश्चिमी उत्तरी अमेरिका और उत्तर-पूर्वी एशिया में मिलेगा। अमेरिका में लोग इसे चंद्रमा के अस्त होते समय देख पाएंगे, जबकि भारत और ऑस्ट्रेलिया में यह चंद्रमा के उदय के समय दिखाई देगा।
चंद्र ग्रहण 2026 के दौरान क्या करें और क्या न करें
क्या करें
- चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से या दूरबीन से देखा जा सकता है; किसी विशेष फिल्टर की आवश्यकता नहीं होती।
- जो लोग धार्मिक परंपराओं का पालन करते हैं, वे सूतक काल का ध्यान रखें।
क्या न करें
चंद्र ग्रहण को भारत सहित कई संस्कृतियों में आध्यात्मिक रूप से संवेदनशील समय माना जाता है।
- खान-पान: बहुत से लोग मानते हैं कि ग्रहण के दौरान भोजन अशुद्ध हो जाता है, इसलिए वे इस समय खाना पकाने या खाने से बचते हैं। पारंपरिक घरों में भोजन को “सुरक्षित” रखने के लिए उसमें कुशा घास या तुलसी के पत्ते रखे जाते हैं।
- व्यक्तिगत शुद्धि: ग्रहण से पहले और बाद में स्नान करना शुद्धि के लिए शुभ माना जाता है।
- आध्यात्मिक साधना: कई लोग इस समय ध्यान, जप और मंत्रों का उच्चारण करके सकारात्मक ऊर्जा एकत्र करते हैं।
गर्भवती महिलाएँ: चिकित्सकीय दृष्टि से गर्भस्थ शिशु को कोई वैज्ञानिक हानि नहीं मानी जाती, लेकिन पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार गर्भवती महिलाओं को घर के अंदर रहने और चाकू जैसी नुकीली वस्तुओं का उपयोग न करने की सलाह दी जाती है।
