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होलाष्टक 2026: तिथि, समय, महत्व और होली से पहले क्या न करें

श्री सस्वता एस.|बुध - 18 फ़र॰ 2026|4 मिनट पढ़ें

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जैसा कि सभी जानते हैं, रंगों का त्योहार होली तेजी से नज़दीक आ रहा है। लेकिन इससे पहले यह जानना बेहद ज़रूरी है कि होली से पूर्व कुछ दिन ऐसे माने जाते हैं जिन्हें अशुभ माना जाता है। इस अवधि को होलाष्टक कहा जाता है। फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होलाष्टक की शुरुआत होती है, जो कुल आठ दिनों तक चलता है और पूर्णिमा तिथि अर्थात होली दहन के दिन समाप्त होता है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, होलाष्टक 24 फरवरी 2026 से शुरू होकर 3 मार्च 2026 (होलिका दहन के दिन) तक रहेगा।

विषय सूची

  • होलाष्टक 2026 की तिथि और समय
  • होलाष्टक का महत्व
  • होलाष्टक के दौरान आध्यात्मिक उपाय
  • होलाष्टक में क्या न करेंहोलाष्टक 2026: तिथि, समय, महत्व और होली से पहले क्या न करें - Utsav App

होलाष्टक 2026 की तिथि और समय

अष्टमी तिथि की शुरुआत: 24 फरवरी 2026 को सुबह 04:54 बजे
अष्टमी तिथि की समाप्ति: 3 मार्च 2026 को शाम 05:09 बजे

होलाष्टक की शुरुआत: 24 फरवरी 2026
होलाष्टक की समाप्ति: 3 मार्च 2026 (होलिका दहन के दिन)

होलाष्टक का महत्व

होलाष्टक की समाप्ति होलिका दहन के साथ होती है, जो बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। होलाष्टक की शुरुआत शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होती है और यह होली से कुछ दिन पहले तक चलता है।
“होलाष्टक” शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है— होली और अष्टक, अर्थात होली से जुड़े आठ दिन। इन आठ दिनों को धार्मिक रूप से अशुभ माना जाता है और इस दौरान किसी भी प्रकार के मांगलिक या शुभ कार्य करने की मनाही होती है।

होलाष्टक के दौरान होलिका दहन की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस समय ग्रहों की विशेष स्थितियों और उनके प्रभाव के कारण नए कार्यों की शुरुआत करना शुभ नहीं माना जाता।

इन दिनों में लोग होली की तैयारी धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों के माध्यम से करते हैं, जैसे— मंत्र जाप, उपवास, दान-पुण्य आदि। यह समय आत्मशुद्धि, भक्ति और नकारात्मक ऊर्जा को त्यागने का होता है। होली का अर्थ भी यही है— पुराने नकारात्मक विचारों को छोड़कर एक नई, ऊर्जावान शुरुआत करना।

होलाष्टक के दौरान आध्यात्मिक उपाय

होलाष्टक के दौरान प्रार्थना, ध्यान और मंत्र जाप जैसे धार्मिक और आध्यात्मिक उपाय करना चाहिए, क्योंकि ये उपाय नकारात्मक ऊर्जा और ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम करने में सहायक माने जाते हैं।

दान और पुण्य कार्य
इस समय गरीबों को भोजन, वस्त्र और धन का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। जरूरतमंदों की सहायता करना, पशुओं को भोजन कराना और सेवा कार्य करना बहुत शुभ फल प्रदान करता है।

भगवान विष्णु और नरसिंह की पूजा
इन दिनों भगवान विष्णु की पूजा करने का विशेष महत्व है। विष्णु सहस्रनाम, विष्णु मंत्र और श्री हरि स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। भक्त प्रह्लाद की तरह भगवान की कृपा पाने के लिए भक्ति भाव से आराधना करनी चाहिए।

संयम और आत्म-नियंत्रण
इस अवधि में मन, वचन और कर्म पर संयम रखना आवश्यक है। क्रोध, नकारात्मक विचार और कटु वाणी से बचना चाहिए। इस समय ब्रह्मचर्य का पालन करना भी आवश्यक माना जाता है।

होलाष्टक में क्या न करें

होलाष्टक के दौरान निम्नलिखित कार्यों से बचना चाहिए:

  • विवाह, गृह प्रवेश, नया घर खरीदना
  • नया व्यवसाय या नौकरी शुरू करना
  • उपनयन संस्कार (जनेऊ) जैसे मांगलिक संस्कार
  • किसी भी प्रकार की नई शुरुआत

ग्रह शांति पूजा से परहेज करें
क्योंकि ग्रह शांति पूजन ग्रहों की स्थिति पर आधारित होता है, इसलिए इस दौरान ऐसे अनुष्ठान करना उचित नहीं माना जाता।

बाल और नाखून न काटें
परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, इन दिनों बाल या नाखून काटना अशुभ माना जाता है और इससे दुर्भाग्य आ सकता है।

असामान्य वस्तुओं को न छुएं
विशेष रूप से चौराहों पर रखी गई अजीब या संदिग्ध वस्तुओं को छूने से बचें, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इनमें नकारात्मक ऊर्जा हो सकती है।

खरीदारी से बचें
होलाष्टक के दौरान नए कपड़े, जूते, आभूषण (सोना, चांदी या नकली आभूषण) खरीदने से परहेज करना चाहिए।


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