माघी पूर्णिमा 2026: आध्यात्मिक महत्व, अनुष्ठान और पूजा विधि
बुध - 29 जन॰ 2025
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1 फरवरी 2026 को आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व माघी पूर्णिमा मनाया जाएगा। यह दिन माघ मास की पूर्णिमा तिथि को आता है और साधु-संतों एवं तपस्वियों द्वारा किए जाने वाले एक माह लंबे संयम और तपस्या के व्रत की पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। इस दिन संगम में पवित्र स्नान करने से अनेक आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं। पूर्णिमा की उज्ज्वल चांदनी में श्रद्धालुओं को इस गहन आध्यात्मिक यात्रा पर निकलने का अवसर मिलता है, जो एक सुखद और आत्मिक रूप से समृद्ध अनुभव प्रदान करता है।
विषय सूची
- माघी पूर्णिमा 2026 का परिचय
- माघी पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व
- माघी पूर्णिमा 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
- माघी पूर्णिमा की व्रत कथा
- माघ पूर्णिमा के अनुष्ठान और पूजा विधि
- माघी पूर्णिमा पर संगम स्नान का महत्व

माघी पूर्णिमा 2026 का परिचय
माघी पूर्णिमा रविवार, 1 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी। शीत ऋतु की इस पूर्णिमा की रात्रि में चंद्रमा के पूर्ण प्रकाश से वातावरण भक्ति और श्रद्धा से परिपूर्ण हो जाता है। चारों ओर आध्यात्मिक ऊर्जा और उत्साह का संचार होता है।
माघी पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व
माघ पूर्णिमा माघ मास का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। पौष पूर्णिमा से पवित्र स्नान का आरंभ होता है और महाशिवरात्रि के साथ इसका समापन होता है। इस अवधि को अत्यंत पुण्यदायक माना गया है।
माघ पूर्णिमा के दिन विवाह, उपनयन संस्कार, गृह प्रवेश तथा अन्य शुभ कार्य करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन नदी में पवित्र स्नान करने से रोग दूर होते हैं, समस्याओं का समाधान होता है और पापों का क्षय होता है।
स्नान के पश्चात भगवान विष्णु की पूजा कर पंचोपचार पूजन किया जाता है और
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप किया जाता है।
इस दिन व्रत रखना, जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र एवं अन्य सामग्री का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। स्नान के बाद किया गया दान व्यक्ति को वर्तमान और पूर्व जन्मों के पापों से मुक्त करता है।
माघ पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और भगवान हनुमान की विशेष पूजा की जाती है ताकि भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण हों। यह दिन मंत्र जाप, यज्ञ, हवन और सफलता की कामना हेतु प्रार्थनाओं के लिए भी विशेष महत्व रखता है। साथ ही, सत्यनारायण पूजा और माघ पूर्णिमा विशेष पूजन भी किए जाते हैं।
माघी पूर्णिमा 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
- माघ पूर्णिमा: रविवार, 1 फरवरी 2026
- पक्ष: शुक्ल पक्ष पूर्णिमा
- पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 1 फरवरी 2026 को प्रातः 12:22 बजे
- पूर्णिमा तिथि समाप्त: 1 फरवरी 2026 को रात्रि 10:08 बजे
- चंद्रोदय: पूर्णिमा के दिन सायं 04:13 बजे
माघी पूर्णिमा की व्रत कथा
लोककथाओं के अनुसार, कांतिका नामक गांव में धनश्वर नामक एक निर्धन ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ रहते थे। धनश्वर भिक्षा मांगकर जीवन यापन करते थे। विवाह के कई वर्षों बाद भी उन्हें संतान प्राप्ति नहीं हुई थी। संतान न होने के कारण समाज में धनश्वर की पत्नी को अपमान और ताने सहने पड़ते थे।
एक योगी ने धनश्वर दंपति को 16 दिनों तक देवी काली की उपासना करने की सलाह दी। सोलहवें दिन देवी काली प्रकट हुईं और उन्हें 32 लगातार पूर्णिमा तिथियों का व्रत रखने और दीप जलाने का निर्देश दिया।
32 पूर्णिमाओं के व्रत के पश्चात धनश्वर की पत्नी गर्भवती हुई और एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम देविदास रखा गया।
जब देविदास सोलह वर्ष का हुआ, तो धनश्वर और उनकी पत्नी ने उसे उसके मामा के पास काशी भेज दिया। वहां देविदास का विवाह हो गया, हालांकि वह स्वयं विवाह नहीं करना चाहता था।
कुछ समय बाद यमराज देविदास को लेने आए, लेकिन वे अपना कार्य पूर्ण नहीं कर सके क्योंकि देविदास के माता-पिता ने पूर्णिमा व्रत का विधिपूर्वक पालन किया था। माता-पिता की भक्ति और व्रत के प्रभाव से देविदास के प्राणों की रक्षा हुई। तभी से माघी पूर्णिमा व्रत की परंपरा प्रचलित मानी जाती है।
माघ पूर्णिमा के अनुष्ठान और पूजा विधि
- प्रातःकाल जागकर पवित्र स्नान करें।
- लकड़ी की चौकी पर माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु (सत्यनारायण स्वरूप) की प्रतिमा स्थापित करें।
- भगवान विष्णु को तुलसी पत्र अर्पित करें और दीपक जलाएं।
- पूर्णिमा के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना वर्जित माना जाता है।
- पूजा मुहूर्त के अनुसार सत्यनारायण पूजा अपराह्न या सायंकाल में करें।
- भगवान को पंचामृत, पंजीरी और केले का भोग अर्पित करें।
- सत्यनारायण कथा, आरती और मंत्रों का पाठ करें।
- सभी पूजा विधियों के पूर्ण होने के पश्चात व्रत का पारण करें।
माघी पूर्णिमा पर संगम स्नान का महत्व
माघी पूर्णिमा हिंदू पंचांग के अनुसार माघ मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह दिन उन साधु-संतों के तप और संयम की पूर्णता का प्रतीक है, जो एक माह तक कठोर व्रत का पालन करते हैं।
संगम में माघी पूर्णिमा के दिन किया गया पवित्र स्नान अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन स्नान करने से कुंभ मेले के सभी प्रमुख स्नान पर्वों का संयुक्त पुण्य प्राप्त होता है।
पूर्णिमा की रात्रि में चंद्रमा का उज्ज्वल प्रकाश ज्ञान के प्रकाश का प्रतीक है, जो अज्ञान का नाश कर साधक के मार्ग को स्पष्ट करता है और आत्मिक उन्नति की ओर ले जाता है।
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