विजया एकादशी व्रत 2026: महत्व, व्रत कथा, पूजा विधि व नियम
मंगल - 03 फ़र॰ 2026
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हिंदू धर्म में सभी पवित्र व्रतों में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है। इन्हीं एकादशियों में फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी, जिसे विजया एकादशी कहा जाता है, विजय और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक मानी जाती है। वर्ष 2026 में यह एकादशी 12 फरवरी को पड़ रही है।
विजया एकादशी का महत्व केवल भगवान विष्णु की उपासना से ही नहीं जुड़ा है, बल्कि इसका ऐतिहासिक संबंध भगवान श्रीराम की रावण पर विजय से भी माना जाता है। यही कारण है कि यह एकादशी विशेष फलदायी और अत्यंत शुभ मानी जाती है।
विषय सूची (Table of Contents)
- विजया एकादशी 2026 की तिथि और समय
- विजया एकादशी का महत्व
- विजया एकादशी की कथा
- विजया एकादशी की पूजा विधि और अनुष्ठान
- विजया एकादशी व्रत के लाभ
- ऑनलाइन विजया एकादशी पूजा कैसे करें

- विजया एकादशी 2026 की तिथि और समय
- तिथि: गुरुवार, 12 फरवरी 2026
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 फरवरी 2026, दोपहर 12:22 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 13 फरवरी 2026, दोपहर 02:25 बजे
विजया एकादशी का महत्व
विजया एकादशी का महत्व हिंदू धर्मग्रंथों में वर्णित एक कथा से जुड़ा हुआ है। कथा के अनुसार, राजा चित्ररथ अपनी पुत्री के लिए योग्य वर नहीं ढूंढ पा रहे थे। उन्होंने भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए यज्ञ किया। भगवान विष्णु प्रकट हुए और राजा को वरदान दिया कि उनकी पुत्री का विवाह उसी व्यक्ति से होगा, जो विजया एकादशी के दिन उनके महल के द्वार पर आएगा।
विजया एकादशी के दिन मिथिला के राजकुमार भगवान श्रीराम राजा चित्ररथ के द्वार पर पहुंचे और उनकी पुत्री का विवाह उनसे हुआ। इसी कारण विजया एकादशी को विजय का प्रतीक माना जाता है और यह बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व माना जाता है।
विजया एकादशी की कथा
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, रामायण काल में जब भगवान श्रीराम वानर सेना के साथ लंका पर आक्रमण करने जा रहे थे, तब उनके सामने समुद्र पार करने की एक बहुत बड़ी चुनौती थी। समुद्र अत्यंत विशाल था और उसे पार करने का कोई मार्ग दिखाई नहीं दे रहा था। श्रीराम ने समुद्र से मार्ग देने की प्रार्थना की, लेकिन जब कोई समाधान नहीं निकला, तब उन्होंने ऋषि-मुनियों से मार्गदर्शन मांगा।
ऋषियों ने भगवान श्रीराम को सलाह दी कि वे वानर सेना सहित फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की विजया एकादशी का व्रत रखें। ऋषियों की बात मानकर भगवान श्रीराम ने विधिपूर्वक विजया एकादशी का व्रत किया और भगवान विष्णु की पूजा की।
ऐसा माना जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से समुद्र पर सेतु निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ। विजया एकादशी व्रत के पुण्य प्रभाव से भगवान श्रीराम ने रावण पर विजय प्राप्त की। तभी से यह व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाने लगा और सामान्य जन भी अपने कार्यों में सफलता और विजय प्राप्त करने के लिए इस व्रत को करने लगे।
विजया एकादशी की पूजा विधि और अनुष्ठान
- एकादशी से एक दिन पहले, अर्थात दशमी के दिन, सोने, चांदी या तांबे का पात्र लें। यदि धातु का पात्र उपलब्ध न हो, तो नया मिट्टी का घड़ा भी लिया जा सकता है।
- उस पात्र को स्वच्छ जल से भरें और उस पर आम के पत्तों से सजावट करें।
- पात्र को ढककर सात अनाजों के ढेर पर स्थापित करें। सात अनाज हैं – जौ, मक्का, कांगनी (कुकनी), गेहूं, चावल, चना और दही या मटर।
- प्रातः स्नान के बाद उस पात्र को पुष्पमाला और चंदन लेप से सजाएं।
- पात्र की पूजा गी के दीपक, चंदन, फूल, तुलसी पत्र और स्वादिष्ट नैवेद्य अर्पित करके करें।
- नारियल से ढके पात्र के ऊपर भगवान श्री नारायण की स्वर्ण प्रतिमा स्थापित करें।
- रात्रि में जागरण करें और भगवान विष्णु का स्मरण करें।
- एकादशी की सुबह स्नान कर पुनः पुष्पमाला और चंदन से पात्र को सजाएं।
- दीप, धूप, फूल और चंदन से पुनः पूजा करें।
- अंत में यह पवित्र पात्र और सभी सामग्री किसी योग्य ब्राह्मण को दान कर दें।
विजया एकादशी व्रत के लाभ
विजया एकादशी प्रत्येक वर्ष महाशिवरात्रि से दो दिन पहले आती है। मान्यता है कि यदि इस दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु की पूजा और व्रत किया जाए, तो सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन के सभी संकट दूर होते हैं। यह व्रत हर कार्य में सफलता दिलाने वाला माना गया है और जीवन के हर क्षेत्र में विजय प्रदान करता है।
ऑनलाइन विजया एकादशी पूजा कैसे करें
इस पावन दिन पर आप उत्सव ऐप के माध्यम से भी पूजा कर सकते हैं। उत्सव ऐप एक आध्यात्मिक प्लेटफॉर्म है, जो आपको आपकी धार्मिक जड़ों से जोड़े रखता है। विजया एकादशी की कथा यह सिखाती है कि भक्ति, विश्वास और धर्म के पालन से धर्म की विजय होती है।
यदि आप व्यस्त जीवनशैली के कारण मंदिर जाकर पूजा नहीं कर पाते, तो उत्सव ऐप के माध्यम से पूजा में भाग ले सकते हैं। पंडित जी आपके नाम और गोत्र से पूजा संपन्न करेंगे, जिसकी वीडियो आपको व्हाट्सएप पर भेजी जाएगी। साथ ही प्रसाद भी आपके घर तक पहुंचाया जाएगा।
आप विजया एकादशी के दिन बांके बिहारी मंदिर, वृंदावन में होने वाली पूजा को उत्सव ऐप के माध्यम से बुक कर सकते हैं।
