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मकर संक्रांति की कम ज्ञात कथाएँ-मकर संक्रांति 2024

शुक्र - 12 जन॰ 2024

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मकर संक्रांति, माघ मास की शुक्ल पक्ष को मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण पर्व है। संक्रांति उस समय को कहा जाता है जब जब सूर्य राशि परिवर्तन करता है, ऐसा साल में १२ बार होता है लेकिन जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है तो इसे मकर संक्रांति कहा जाता है। इसके बाद से दिन बड़ा और रात्रि की अवधि कम हो जाती है।

तिथि के अनुसार मकर संक्रांति कब है?

इस साल मकर संक्रांति १५ जनवरी को मनाया जाएगा ।क्योकि ग्रहों के राजा सूर्य १४ जनवरी को अर्धरात्रि २ बजकर ४२ मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे।वही उदया तिथि १५ जनवरी को प्राप्त हो रही है इसलिये मकर संक्रांति १५ को है इसके साथ ही एक माह का ख़र्मास भी इसी दिन से समाप्त हो रहा है।
मकर संक्रान्ति पुण्य काल- सुबह 07:15 से शाम 05:46 तक
अवधि- 10 घण्टे 31 मिनट्स
मकर संक्रान्ति महा पुण्य काल- सुबह 07:15 से 09:00 तक।
अवधि- 01 घण्टा 45 मिनट्स।
मकर संक्रान्ति का क्षण- 02:54 एएम।

इस दिन के शुभ मुहूर्त क्या है?

अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:09 से 12:51 तक।
विजय मुहूर्त : दोपहर 02:16 से 02:58 तक।
गोधूलि मुहूर्त: शाम 05:43 से 06:10 तक।
रवि योग: सुबह 07:15 से 08:07 तक।

मकर संक्रांति पर किसकी पूजा की जाती है?

मकर संक्रांति का उत्सव, भगवान सूर्य की पूजा के लिए समर्पित है। भक्त इस दिन भगवान सूर्य की पूजा कर आशीर्वाद मांगते हैं, इस दिन से वसंत ऋतु की शुरुआत और नई फसलों की कटाई शुरू होती है। मकर संक्रांति पर भक्त यमुना, गोदावरी, सरयू और सिंधु नदी में पवित्र स्नान करते हैं और भगवान सूर्य को अर्घ्य देते हैं, इस दिन यमुना स्नान और जरूरतमंद लोगों को भोजन, दालें, अनाज, गेहूं का आटा और ऊनी कपड़े दान करना शुभ माना जाता है।

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कौन से मंदिर में पूजा की जाती है, हम ऑनलाइन पूजा कैसे करवा सकते है?

मयूक आदित्य मंदिर में मकर संक्रांति के दिन पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन मंदिर में पूजा से पुण्य प्राप्त होता है आप भी उत्सव ऐप के माध्यम से इस पूजा को बुक करा सकते है।पूजा बुक करने के लिए नीचे दी गई लिंक पर क्लिक करे- Click here 

मकर संक्रांति का ऐतिहासिक महत्व क्या है?

ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान भास्कर अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उसके घर जाते हैं। चूँकि शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं, अत: इस दिन को मकर संक्रान्ति के नाम से जाना जाता है। । मकर संक्रान्ति के दिन ही गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई सागर में जाकर मिली थीं।

मकर संक्रांति से कौन कौन सी परंपरा जुड़ी है?

मकर संक्रांति से बहुत सी परंपराएं और मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। इस दिन चावल और उड़द की दाल की खिचड़ी बनाने और दान करने की भी परंपरा है। इसके अलावा तिल और गुड़ के लड्डू भी इस दिन बनाए जाते हैं। मकर संक्रांति के दिन माथे पर हल्दी या कुमकुम का तिलक लगाया जाता है। हल्दी और कुमकुम का रंग शुभ माना जाता है और इन्हें माथे पर लगाने से मन शांत रहता है।

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काले कपड़े क्यों पहने जाते है?

हिंदू धर्म के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन से सूर्य उत्तरायण होता है यानी उत्तर दिशा में की ओर जाता है और ऐसा कहा जाता है कि इस दिन से सर्दियों का सीजन खत्म होने लगता है और पतझड़ शुरू हो जाता है।कहा जाता है कि इस दिन से पहले बहुत कड़ाके की ठंड पड़ती है। काले रंग के कपड़े अपने अंदर गर्मी सोख लेते हैं जिससे शरीर में गर्मी बनी रहती है इसलिए वैज्ञानिक दृष्टि से काले रंग के कपड़े पहनना अच्छा बताया गया है। काले रंग के कपड़े पहनने से सर्दी से बचाव भी होता है।

खिचड़ी बनाने का क्या महत्व है?

मकर संक्रांति के त्योहार में खिचड़ी बनाने और खिचड़ी दान करने के पीछे बाबा गोरखनाथ की एक फेमस कथा प्रचलित है।ऐसा कहा जाता है कि जब खिलजी ने आक्रमण किया था, उस समय चारों तरफ हाहाकार मच गया था।युद्ध की वजह से नाथ योगियों को भोजन बनाने का भी समय नहीं मिल पाता था।लगातार भोजन की कमी से वे कमजोर होते जा रहे थे।नाथ योगियों की उस दशा को बाबा गोरखनाथ नहीं देख सके और उन्होंने लोगों से दाल चावल और सब्जी को एक साथ मिलाकर पकाने की सलाह दी।बाबा गोरखनाथ की यह सलाह सभी नाथ योगियों के बड़े काम आई।दाल चावल और सब्जी एक साथ मिलाने से बेहद कम समय में आसानी से पक गया और इसके बाद बाबा गोरखनाथ ने ही इस पकवान को खिचड़ी का नाम दिया। खिलजी से युद्ध समाप्त होने के बाद बाबा गोरखनाथ और योगियों ने मकर संक्रांति के दिन उत्सव मनाया और उस दिन लोगों को खिचड़ी बाटी।उसी दिन से मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी बाटने और बनाने की प्रथा शुरू हो गई।


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क्यों लगाया जाता है दही-चूड़ा का भोग?

इसके अलावा देश के कई राज्यों में खिचड़ी के दिन दही चूड़ा का भोग लगाने और इसे खाने की भी प्रथा है। हिंदू धर्म में ऐसी मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन दही चूड़ा खाने और सूर्य भगवान को इसका भोग लगाने से रिश्तों में मजबूती आती है।एक मान्यता यह भी है दही चूड़ा खाने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है।खिचड़ी के दिन दही चूड़ा का भोग भी लगाया जाता है।

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मकर संक्रांति पर स्नान दान का महत्व क्या है?

मकर संक्रांति का उत्सव भगवान सूर्य की पूजा के लिए समर्पित है।भक्त इस दिन भगवान सूर्य की पूजा कर आशीर्वाद मांगते हैं, इस दिन से वसंत ऋतु की शुरुआत और नई फसलों की कटाई शुरू होती है।मकर संक्रांति पर भक्त यमुना, गोदावरी, सरयू और सिंधु नदी में पवित्र स्नान करते हैं और भगवान सूर्य को अर्घ्य देते हैं, इस दिन यमुना स्नान और जरूरतमंद लोगों को भोजन, दालें, अनाज, गेहूं का आटा और ऊनी कपड़े दान करना शुभ माना जाता है।

पतंग उड़ाने का महत्व क्या है?

धार्मिक कथाओं के अनुसार मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा की शुरुआत भगवान राम ने थी। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार जब भगवान राम ने पहली बार इस त्यौहार में पतंग उड़ाई थी तो वह पतंग इंद्रलोक में चली गई थी। वहीं से भगवान राम की इस परंपरा को लोग आज भी श्रद्धा के साथ मनाते हैं।पतंग उड़ाने के पीछे उद्देश्य सूर्य के प्रकाश में समय बिताना है।वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो मकर संक्रांति पर सूर्य की किरणें अमृत समान होती है।

मकर संक्रांति को भारत के अलग अलग राज्यो में क्या कहा जाता है?

मकर संक्रांति (संक्रान्ति) : छत्तीसगढ़, गोआ, ओड़ीसा, हरियाणा, बिहार, झारखण्ड, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, राजस्थान, सिक्किम, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, पश्चिम बंगाल, गुजरात और जम्मू

ताइ पोंगल, उझवर तिरुनल : तमिलनाडु
उत्तरायण : गुजरात, उत्तराखण्ड
उत्तरैन[1], माघी संगरांद : जम्मू
शिशुर सेंक्रात : कश्मीर घाटी
माघी : हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब
भोगाली बिहु : असम
खिचड़ी : उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बिहार
पौष संक्रान्ति : पश्चिम बंगाल
मकर संक्रमण : कर्नाटक

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मकर संक्रांति को भारत के बाहर किस नाम से कहा जाता है?


बांग्लादेश : पौष संक्रान्ति
नेपाल : माघे संक्रान्ति या 'माघी संक्रान्ति' 'खिचड़ी संक्रान्ति'
थाईलैण्ड : सोंगकरन
लाओस : पि मा लाओ
म्यांमार : थिंयान
कम्बोडिया : मोहा संगक्रान
श्री लंका : पोंगल, उझवर तिरुनल

मकर संक्रांति पर कौन कौन से काम नहीं करना चाहिए?

मकर संक्रांति के दिन भूल से भी रात का बचा हुआ या बासी खाना और तामसिक भोजन नहीं खाएं, नशा नहीं करें।
इस दिन किसी गरीब को घर से खाली हाथ नहीं लौटाएं।
घर के अंदर या बाहर किसी पेड़ की कटाई-छंटाई भी नहीं करें।
अपनी वाणी पर संयम रखे।


इस दिन कौन से मंत्रों का जाप करना चाहिए?
ओम ऐहि सूर्य सह स्त्रांशों तेजोराशे जग त्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घ्यं नमो स्तुते।।मकर संक्रांति पर सूर्य को जल चढ़ाते समय इस मंत्र का जाप करें, कहते हैं इससे कुंडली में सूर्य मजबूत होते हैं।

इन मंत्रों का जाप मकर संक्रांति पर करने से जीवन में आशीर्वाद और समृद्धि आती है और सुख शांति की प्राप्ति होती है।















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