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आज का पंचांग

उत्सव पंचांग - सटीक, प्रामाणिक और परंपरा में निहित

आज - 11 फ़र॰ 2026

फ़र॰

11

बुध

Krishna Paksha - Navami

बुधवार

panchang
flower

शुभ मुहूर्त

Abhijit Muhurat

6:43 AM से 7:28 AM

Amrit Kaal

2:17 AM से 4:04 AM

Brahma Muhurat

12:00 AM से 12:48 AM

flower

अशुभ मुहूर्त

Rahu Kaal

7:05 AM से 8:28 AM

Yamaganda

2:56 AM से 4:19 AM

Gulika

5:42 AM से 7:05 AM

Dur Muhurat

7:28 AM से 8:14 AM

Varjyam

6:09 AM से 7:56 AM

flower

सूर्योदय

1:32 AM

सूर्यास्त

12:38 PM

चंद्रोदय

8:46 PM

चंद्रास्त

6:56 AM

तिथि

Navami

10 फ़र॰ 2026 1:59 am से 11 फ़र॰ 2026 4:27 am

Dashami

11 फ़र॰ 2026 4:29 am से 12 फ़र॰ 2026 6:51 am

नक्षत्र

Anuradha

10 फ़र॰ 2026 4:13 am से 11 फ़र॰ 2026 7:08 am

Jyeshtha

11 फ़र॰ 2026 7:09 am से 12 फ़र॰ 2026 9:57 am

कर्ण

Gara

10 फ़र॰ 2026 3:14 pm से 11 फ़र॰ 2026 4:27 am

Vanija

11 फ़र॰ 2026 4:29 am से 11 फ़र॰ 2026 5:41 pm

Vishti

11 फ़र॰ 2026 5:42 pm से 12 फ़र॰ 2026 6:51 am

योग

Dhruva

09 फ़र॰ 2026 10:39 pm से 10 फ़र॰ 2026 11:28 pm

Vyaghata

10 फ़र॰ 2026 11:29 pm से 12 फ़र॰ 2026 12:14 am

आगामी त्योहार

फ़र॰

13

कुंभ संक्रांति

कुंभ संक्रांति — सूर्य के कुंभ राशि में प्रवेश के साथ ऋतु‑परिवर्तन व नए आरंभ का प्रतीक दिन।

फ़र॰

13

विजया एकादशी

"एकादशी तिथि प्रारंभ – 12 फ़रवरी 2026, दोपहर 12:22 बजे एकादशी तिथि समाप्त – 13 फ़रवरी 2026, दोपहर 02:25 बजे" विष्णु भगवान समर्पित विजय एकादशी — व्रत करने से आत्म‑शुद्धि, पापों से मुक्ति व जीवन में शुभ‑सफलता लाने की इच्छा होती है।

फ़र॰

14

शनि प्रदोष व्रत

"त्रयोदशी तिथि प्रारंभ – 14 फ़रवरी 2026, शाम 04:01 बजे त्रयोदशी तिथि समाप्त – 15 फ़रवरी 2026, शाम 05:04 बजे" शनिवार को प्रदोष व्रत — शनिदेव या शिवजी की अराधना, दुख‑कष्ट, पापों व ग्रहदोष से मुक्ति के लिए किया जाता है।

फ़र॰

15

महाशिवरात्रि

"चतुर्दशी तिथि प्रारंभ – 15 फ़रवरी 2026, शाम 05:04 बजे चतुर्दशी तिथि समाप्त – 16 फ़रवरी 2026, शाम 05:34 बजे" "महा शिवरात्रि — फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी पर शिवजी की पूजा‑आराधना, रात्रि जागरण व व्रत; अज्ञान व पाप से मुक्ति, आध्यात्मिक शुध्दि का दिन।"

फ़र॰

17

फाल्गुन अमावस्या

"तिथि प्रारंभ – 16 फ़रवरी, शाम 05:34 बजे तिथि समाप्त – 17 फ़रवरी, शाम 05:30 बजे" फाल्गुन मास की अमावस्या — पितृ तर्पण, श्राद्ध, आत्म‑चिंतन या विशेष पूजा‑पाठ के लिए उपयुक्त माना जाता दिन।

फ़र॰

19

फुलेरा दूज

"द्वितीया तिथि प्रारंभ – 18 फ़रवरी 2026, शाम 04:57 बजे द्वितीया तिथि समाप्त – 19 फ़रवरी 2026, दोपहर 03:58 बजे" फुलेरा दूज — कुछ क्षेत्रों में फाल्गुन मास में मनाया जाने वाला दिन; होली या वसंत के स्वागत हेतु फूल‑पुष्प, रंग‑भक्ति आदि से जुड़ा पर्व।

फ़र॰

21

धुंडिराज चतुर्थी

"चतुर्थी तिथि प्रारंभ – 20 फ़रवरी 2026, दोपहर 02:38 बजे चतुर्थी तिथि समाप्त – 21 फ़रवरी 2026, दोपहर 01:00 बजे" धुंदिराज चतुर्थी” — एक विशेष चतुर्थी व्रत/अनुष्ठान; इसकी विशिष्टताएँ क्षेत्रीय या स्थानीय परंपराओं के अनुसार, विशेषकर उत्तर भारत में, भिन्न-भिन्न होती हैं।

फ़र॰

22

स्कंद षष्ठी

"तिथि प्रारंभ – 22 फ़रवरी, सुबह 11:09 बजे तिथि समाप्त – 23 फ़रवरी, सुबह 09:09 बजे" स्कंद षष्ठी भगवान स्कंद (कार्तिकेय) को समर्पित पवित्र दिवस है, जो उनके दैत्य सुरपद्म पर विजय का उत्सव मनाता है। भक्त उपवास और विशेष पूजा करके साहस, शक्ति और रक्षा की प्रार्थना करते हैं।

फ़र॰

24

मासिक दुर्गा अष्टमी (फाल्गुन मास विशेष)

"तिथि प्रारंभ – 24 फ़रवरी, सुबह 07:01 बजे तिथि समाप्त – 25 फ़रवरी, सुबह 04:51 बजे" देवी दुर्गा की मासिक अष्टमी पूजा।

फ़र॰

27

आमलकी एकादशी

"एकादशी तिथि प्रारंभ – 27 फ़रवरी 2026, रात 12:33 बजे एकादशी तिथि समाप्त – 27 फ़रवरी 2026, रात 10:32 बजे" विष्णु भक्तों की एकादशी जिसमें आंवले की पूजा होती है।


आगामी पूजा

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Tantric Puja to Stop Money Loss and Open Income from All Directions.

Aghor Ganapati Maha Tantra Yukt Bhasma Ahuti Havan

उच्छिष्ट गणपति मंदिर, Ujjain

बुध - 11 फ़र॰ 2026 - बुधवार विशेष

1.0k+ भक्त

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Puja to Clear Blockages & Fulfillment of Relationships

Budh Shani Margi 500 Years Graha Shanti Jackpot Mahapuja

नवग्रह शनि मंदिर, Ujjain

बुध - 11 फ़र॰ 2026 - बुधवार विशेष

1.0k+ भक्त

पूजा करें
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Puja to Break Ancestral Curses and Turn Struggles into Success.

Chintamani Ganesh Vighnaharan Ketu Shanti Maha Puja

चिंतामण गणेश, Kashi

बुध - 11 फ़र॰ 2026 - बुधवार विशेष

1.0k+ भक्त

पूजा करें
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Tantrik Ganesh Puja for Sudden Wealth from Rahu, Ketu, and Shani.

Sankasthi Chaturthi Visesh Ucchista Ganesh Ghrit-Sneham Madhuras Maha Abhishek

उच्छिष्ट गणपति मंदिर, Ujjain

बुध - 11 फ़र॰ 2026 - बुधवार विशेष

1.0k+ भक्त

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करियर में उन्नति, प्रसिद्धि और धन के लिए पूजा

चिंतामणि गणेश काशी विशेष अर्चना पूजा

चिंतामण गणेश, Kashi

बुध - 11 फ़र॰ 2026 - बुधवार विशेष

1.0k+ भक्त

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करियर में उन्नति, प्रसिद्धि और धन के लिए पूजा

चिंतामणि गणेश विशेष 1008 गणेश सहस्र अर्चना पाठ और केतु शांति पूजा

त्रिमुखी गणेश मंदिर, Kashi

बुध - 11 फ़र॰ 2026 - बुधवार विशेष

9.2k+ भक्त

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करियर में उन्नति, प्रसिद्धि और धन के लिए पूजा

चिंतामणि गणेश विशेष 1008 गणेश सहस्र अर्चना पाठ और केतु शांति पूजा

चिंतामण गणेश, Kashi

बुध - 11 फ़र॰ 2026 - बुधवार विशेष

9.2k+ भक्त

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सौभाग्य और एकाएक धन प्राप्ति के लिए पूजा

बुध प्रदोष व्रत विशेष बूढ़ेश्वर महादेव 9000 मूल मंत्र जाप एवं महाअभिषेक

बूढ़ेश्वर मंदिर, Prayagraj

बुध - 11 फ़र॰ 2026 - बुधवार विशेष

1.0k+ भक्त

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7 सप्ताह दान अनुशंसित

बुधवार केतु शांति दोष मुक्ति साप्ताहिक दान सेवा - चिंतामणि गणेश

चिंतामण गणेश, Kashi

बुध - 11 फ़र॰ 2026 - बुधवार विशेष

13.8k+ भक्त

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8 सप्ताह का डान अनुशंसित

बुधवार राहु पैठाणी मंदिर उत्तराखंड साप्ताहिक तिल एवं पुष्प दान

राहु पैठानी मंदिर, Paithani

बुध - 11 फ़र॰ 2026 - बुधवार विशेष

28.1k+ भक्त

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उत्सव ऑनलाइन पंचांग - आपका प्रमाणिक वैदिक कैलेंडर

उत्सव पंचांग एक परिष्कृत हिंदू कैलेंडर है जिसका उपयोग वैदिक समयपालन के लिए किया जाता है। यह केवल एक तिथि ट्रैकर नहीं है, बल्कि पंचांग एक विशेष खगोलीय गणना प्रणाली के रूप में कार्य करता है, जिसे दिन के चक्र के भीतर सबसे अनुकूल (शुभ) और प्रतिकूल (अशुभ) क्षणों को प्रकट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

संस्कृत शब्द ‘पंचांगम’ का अर्थ है ‘पाँच अंग’ (पंच = पाँच, अंग = भाग)। यह प्राचीन उपकरण ज्योतिषियों और आध्यात्मिक साधकों के लिए अत्यंत आवश्यक है, जो अपनी दैनिक गतिविधियों को ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ संरेखित करना चाहते हैं। सूर्य और चंद्रमा की स्थितियों को ट्रैक करके, पंचांग केवल सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त तक सीमित न रहते हुए उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण खगोलीय जानकारी प्रदान करता है।

भौगोलिक सटीकता: स्थान क्यों मायने रखता है

पंचांग पृथ्वी पर किसी विशिष्ट स्थान के सापेक्ष खगोलीय स्थितियों पर आधारित होकर कार्य करता है। परिणामस्वरूप, इसका विवरण केवल उसी भौगोलिक क्षेत्र के लिए सटीक होता है, जिसके लिए इसकी गणना की जाती है। उत्सव पंचांग आपके वर्तमान शहर के निर्देशांकों का उपयोग करके गतिशील रूप से उत्पन्न होता है, जिससे महत्वपूर्ण समयों के लिए उच्चतम सटीकता सुनिश्चित की जा सके। सभी ज्योतिषीय अवधियों की शुरुआत और समाप्ति सीधे स्थानीय क्षितिज और सौर चक्र से जुड़ी होती है।

पंचांग के पाँच आवश्यक अंग

दैनिक पंचांग का आधार पाँच मुख्य खगोलीय घटकों पर टिका होता है:

  • तिथि (Lunar Day): यह सूर्य और चंद्रमा के बीच कोणीय अंतर को मापती है। यह सभी हिंदू त्योहारों और उपवासों की तिथियाँ निर्धारित करने का प्राथमिक कारक है।
  • नक्षत्र (Star Constellation): यह राशि चक्र के 27 निश्चित नक्षत्रों में से किसी एक में चंद्रमा की स्थिति द्वारा निर्धारित किया जाता है। इसका उपयोग नामकरण जैसे संस्कारों और अनुकूलता के आकलन के लिए किया जाता है।
  • वार (Weekday): यह एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक की समयावधि होती है, जिस पर सात ग्रहों में से एक का शासन होता है।
  • योग (Union): सूर्य और चंद्रमा के संयुक्त देशांतर से उत्पन्न 27 योग होते हैं, जो दिन के समग्र स्वभाव और प्रभाव को दर्शाते हैं।
  • करण (Half-Tithi): यह एक तिथि का आधा भाग होता है। ग्यारह करणों में से विशेष रूप से विष्टि करण से बचने पर जोर दिया जाता है, जिसे नई शुरुआत के लिए अत्यंत अशुभ माना जाता है।
शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

पाँच प्रमुख पंचांग तत्वों को आकाशीय समयों के साथ जोड़कर निम्नलिखित विशिष्ट मुहूर्त निर्धारित किए जाते हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त: यह अत्यंत पवित्र समय भोर से पहले होता है और ध्यान, साधना तथा अध्ययन प्रारंभ करने के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
  • संध्या काल (प्रातः, मध्याह्न, सायाह्न): ये दिन के तीन निर्धारित काल होते हैं, जिनमें हिंदू धर्म के अनुयायी पारंपरिक रूप से अपनी दैनिक धार्मिक प्रार्थनाएँ और अनुष्ठान करते हैं।
  • अभिजीत मुहूर्त: यह दोपहर के आसपास का स्वाभाविक रूप से अनुकूल समय होता है। यदि कोई अन्य शुभ मुहूर्त उपलब्ध न हो, तो यह अवधि महत्वपूर्ण कार्य आरंभ करने के लिए एक शक्तिशाली विकल्प के रूप में कार्य करती है।
  • विजय मुहूर्त: यात्रा प्रारंभ करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाने वाला यह समय सफलता और उद्देश्य की प्राप्ति की संभावना को बढ़ाता है।
  • राहु काल: यह प्रत्येक दिन की एक विशिष्ट अशुभ अवधि होती है, जिसमें किसी भी नए या महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत से पूरी तरह बचना चाहिए।
  • संकल्प: किसी भी औपचारिक पूजा का एक अभिन्न अंग, जिसमें समय और स्थान को स्थापित करने हेतु पंचांग के पाँचों अंगों तथा प्रमुख ग्रह स्थितियों (विशेष रूप से सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति) का उच्चारण किया जाता है।

उत्सव पंचांग का दैनिक संदर्भ लेकर, आप नकारात्मक ग्रह प्रभावों को कम करते हुए तथा समृद्धि और आध्यात्मिक विकास के अवसरों को अधिकतम करते हुए अपने दिन की रणनीतिक योजना बना सकते हैं।

सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न