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महेश नवमी 2025: दिव्य उत्पत्ति, पूजा विधि, आस्था और उत्सव

श्री सस्वता एस.|सोम - 26 मई 2025|3 मिनट पढ़ें

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महेश नवमी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक पुनर्मिलन है। यह पर्व भगवान शिव (महेश) और देवी पार्वती को समर्पित है और महेश्वरी समुदाय के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यही उनके आध्यात्मिक उद्भव का प्रतीक है। यह दिन परिवर्तन, क्षमा और धर्ममय जीवन की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

महेश नवमी 2025 – तिथि और समय

तिथि प्रारंभ: 3 जून 2025 – रात 9:56 बजे
तिथि समाप्त: 4 जून 2025 – रात 11:54 बजे
मुख्य उत्सव तिथि: 4 जून 2025 (बुधवार)

🧘‍♀️ उदया तिथि के अनुसार, जिस दिन सूर्योदय के समय नवमी हो, वही दिन पर्व के रूप में मनाया जाता है — अतः 4 जून को महेश नवमी मनाई जाएगी।

पौराणिक कथा: क्यों मनाई जाती है महेश नवमी?

यह पर्व एक दिव्य परिवर्तन की कथा को दर्शाता है।
प्राचीन काल में राजा सुजन सेन और उनके 72 योद्धा वन में एक यज्ञ में विघ्न डाल देते हैं। ऋषियों के श्राप से वे सभी पत्थर बन जाते हैं। उनकी पत्नियाँ, रानी चंद्रवती के नेतृत्व में, एक गुफा में कठोर तप करती हैं और "ॐ नमो महेश्वराय" का जाप करती हैं।
उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव और माता पार्वती प्रकट होते हैं और उन्हें जीवनदान देकर आशीर्वाद देते हैं कि वे अब युद्ध नहीं बल्कि व्यापार और धर्म का जीवन जिएं। यही महेश्वरी समुदाय की आध्यात्मिक उत्पत्ति मानी जाती है।

महेश नवमी और प्रमुख मंदिर

महेश मंदिर, मांडलेश्वर (मध्यप्रदेश)
नर्मदा तट पर स्थित यह मंदिर महेश्वरी समुदाय की प्राचीन आस्था का केंद्र है।
एकलिंगजी महादेव मंदिर, उदयपुर
चार मुखों वाले शिवलिंग के साथ यह मंदिर राजस्थान में शिवभक्तों का तीर्थस्थल है।
महेश्वरी माता मंदिर
राजस्थान के कई क्षेत्रों में देवी पार्वती को महेश्वरी माता के रूप में पूजा जाता है, जो कुलदेवी मानी जाती हैं।

महेश नवमी 2025: दिव्य उत्पत्ति, पूजा विधि, आस्था और उत्सव - Utsav App

🕉️ महेश नवमी का आध्यात्मिक महत्व

यह पर्व केवल महेश्वरी समाज ही नहीं, बल्कि हर शिव-भक्त के लिए विशेष होता है:
🌿 क्षमा और आत्मपुनर्जागरण
शिव की तरह क्षमा कर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
🌸 दिव्य युगल की आराधना
शिव-पार्वती की पूजा से पारिवारिक सुख और सामंजस्य प्राप्त होता है।
🔱 धर्म, संयम और करुणा का संदेश
यह दिन हमें जीवन में सच्चाई, अनुशासन और सेवा को अपनाने का सन्देश देता है।

महेश नवमी पर पूजा विधि और परंपराएं

 प्रातःकालीन कर्म
सूर्योदय से पहले गंगाजल से स्नान करें।
सफेद या केसरिया पारंपरिक वस्त्र धारण करें।
🛕 शिव-पार्वती पूजा
शिवलिंग का अभिषेक करें दूध, दही, घी, शहद और जल से।
बेलपत्र, धतूरा और सफेद कमल चढ़ाएं।
माता पार्वती को लाल फूल, सिंदूर और नारियल अर्पित करें।
📖 मंत्र जाप और भक्ति
“ॐ नमः शिवाय”, शिव चालीसा और महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करें।
डमरू और शंखनाद से वातावरण को पवित्र करें।
🕯️ व्रत और दान
सात्विक व्रत रखें – प्याज, लहसुन और तामसिक भोजन से परहेज करें।
अन्न, वस्त्र या धन का दान करें।
💑 दंपतियों के लिए विशेष अनुष्ठान
जोड़े इस दिन एक साथ पूजा कर वैवाहिक सुख की कामना करते हैं।
संतान सुख की कामना करने वाले भी विशेष पूजन करते हैं।

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📜 नाम-गोत्र सहित विशेष संकल्प और हवन
🌍 ग्लोबल एक्सेस — किसी भी देश या टाइम ज़ोन से पूजा में जुड़ें

आज क्यों ज़रूरी है महेश नवमी?

आज के समय में जब जीवन भागदौड़ भरा और रिश्ते बिखरे हुए हैं, यह पर्व आत्मचिंतन और पारिवारिक एकता का अवसर देता है।
यह बताता है कि भक्ति से हर श्राप भी वरदान बन सकता है।

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