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मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती 2024: भक्तों के लिए महत्व, अनुष्ठान और उपवास संबंधी दिशा-निर्देश

श्री सस्वता एस.|सोम - 02 दिस॰ 2024|4 मिनट पढ़ें

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एकादशी भारत और दुनिया भर में हिंदू धर्म के अनुयायियों द्वारा मनाया जाने वाला एक पवित्र आध्यात्मिक व्रत है। हिंदू चंद्र कैलेंडर में दो चंद्र चक्र होते हैं: शुक्ल पक्ष (बढ़ते चंद्रमा का पखवाड़ा) और कृष्ण पक्ष (घटते चंद्रमा का पखवाड़ा)। एकादशी शब्द हर चंद्र चक्र के 11वें दिन को दर्शाता है, और इसी कारण एकादशी हर माह में दो बार आती है, यानी कुल 24 एकादशी व्रत होते हैं। एकादशी व्रत भगवान विष्णु के सम्मान में किए जाते हैं और इसे सबसे पवित्र व्रत माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु अपने भक्तों को सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और संबंधों में सामंजस्य प्रदान करते हैं।

यह व्रत मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग खोलता है। एकादशी की रात जागरण, भगवान की स्तुति और प्रार्थना इस व्रत के महत्वपूर्ण अंग हैं। पूरी रात जागकर व्रत रखना इससे जुड़ा एक विशेष उपाय है जो व्रत के लाभ को कई गुना बढ़ा देता है। विशेष रूप से वैष्णव संप्रदाय के लोग एकादशी पर उपवास करते हैं, जिनमें कुछ लोग निर्जला उपवास रखते हैं, जिसे भगवान विष्णु को अत्यधिक प्रिय माना जाता है।

विषय सूची:

1. मोक्षदा एकादशी का अर्थ
2. मोक्षदा एकादशी 2024 के लिए प्रमुख तिथियाँ और समय
3. मोक्षदा एकादशी व्रत के नियम और अनुष्ठान
4. मोक्षदा एकादशी पर क्या करें: एक चरण-दर-चरण मार्गदर्शिका
5. मोक्षदा एकादशी के मंत्रों का जाप करें
6. मोक्षदा एकादशी व्रत के लाभ
7. मोक्षदा एकादशी और दान: दान की शक्ति

मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती 2024: भक्तों के लिए महत्व, अनुष्ठान और उपवास संबंधी दिशा-निर्देश - Utsav App

मोक्षदा एकादशी का अर्थ

मोक्षदा एकादशी, जो नवंबर और दिसंबर (हिंदू कैलेंडर के अनुसार मार्गशीर्ष मास) के महीनों में शुक्ल पक्ष के 11वें दिन आती है, इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने कुरुक्षेत्र के युद्ध भूमि पर अर्जुन को श्रीमद्भगवद गीता का उपदेश दिया था। इसलिए इसे गीता एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवद गीता का दान करना भगवान श्री कृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त करने का कारण बनता है। मोक्षदा एकादशी को वैकुंठ एकादशी भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु का वास स्थल वैकुंठ, उनके भक्तों के लिए खुला होता है। दक्षिण भारत में इसे मुक्कोटी एकादशी के नाम से जाना जाता है।

मोक्षदा एकादशी 2024 के लिए प्रमुख तिथियाँ और समय

मोक्षदा एकादशी 2024 बुधवार, 11 दिसंबर को पड़ेगी।
- मोक्षदा एकादशी तिथि: 11 दिसंबर, 2024 को सुबह 03:42 बजे से शुरू होगी।
- मोक्षदा एकादशी तिथि समाप्त: 12 दिसंबर, 2024 को सुबह 01:09 बजे।
- पारण समय: 12 दिसंबर को सुबह 06:28 बजे - 08:47 बजे।
पारण के दिन हरि वासरा सुबह 06:28 बजे समाप्त हो जाएगा। व्रत रखने वालों को एकादशी के बाद अगले दिन सूर्योदय के बाद इसे तोड़ना चाहिए, और व्रत द्वादशी तिथि के भीतर ही तोड़ा जाना चाहिए।

मोक्षदा एकादशी व्रत के नियम और अनुष्ठान

मोक्षदा एकादशी के अनुष्ठान प्राचीन हिंदू ग्रंथों में विस्तार से वर्णित हैं, और भगवान श्री कृष्ण ने महाभारत में युधिष्ठिर के प्रश्नों का उत्तर देते हुए इन नियमों को बताया था।

व्रत की विधि इस प्रकार है:

1. एकादशी से एक दिन पहले: कृष्ण पक्ष के दसवें दिन, व्यक्ति को दोपहर में अच्छे से दांत साफ करने चाहिए और सूर्यास्त से पहले भोजन करना चाहिए।
2. मोक्षदा एकादशी की सुबह: व्रत रखने का संकल्प लें और नदी या जलाशय में स्नान करें, यदि नदियाँ नहीं हैं तो तालाब या सामान्य पानी से स्नान कर सकते हैं।
3. स्नान के बाद: शरीर पर मिट्टी लगाकर धरती माता की प्रार्थना करें और भगवान विष्णु की पूजा करें। पूजा में फूल, फल, प्रसाद चढ़ाएं।
4. व्रत के दौरान: पूरे दिन भगवान विष्णु का भजन, कीर्तन और स्तुति करें। दीपक जलाएं और ध्यान केंद्रित करें।
5. पारण विधि: व्रत के बाद ब्राह्मणों को दान दें और फिर व्रत तोड़ते समय विशेष प्रार्थना करें: "मैं अब भोजन करने जा रहा हूँ, पुण्डरीकाक्ष, कमल-नेत्र वाले प्रभु, कृपया मेरी रक्षा करें।"

मोक्षदा एकादशी पर क्या करें: एक चरण-दर-चरण मार्गदर्शिका

1. स्नान और पूजा: मोक्षदा एकादशी की सुबह स्नान करें और पूजा विधि का पालन करें।
2. उपवास नियम: इस दिन अनाज, फलियाँ और अन्य खाद्य पदार्थों का सेवन न करें। हिंसा से दूर रहें और शाकाहारी भोजन करें।
3. ध्यान और भजन: भगवान विष्णु का जाप करें, भजन और कीर्तन में भाग लें।
4. दान: ब्राह्मणों को दान दें और जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े या अन्य चीजें दान करें।

मोक्षदा एकादशी के मंत्रों का जाप करें

भक्त श्री विष्णु मंत्र का जाप कर सकते हैं:
"ओम नमो भगवते वासुदेवाय"
"श्री वासुदेवाय गायत्री मंत्र: ओम नमो भगवते वासुदेवाय नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णु प्रचोदयात।"

मोक्षदा एकादशी व्रत के लाभ

उत्तर पुराण में एकादशी के व्रत के महत्व का विस्तार से वर्णन किया गया है। भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा कि यह व्रत सभी यज्ञों, बलिदानों और यहां तक कि भगवान विष्णु से मिलने से भी अधिक पुण्यदायक है। जो व्यक्ति इस दिन व्रत करता है और नियमों का पालन करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है और वह भगवान विष्णु के धाम में स्थान प्राप्त करता है।

मोक्षदा एकादशी और दान: दान की शक्ति

मोक्षदा एकादशी पर दान करना अत्यधिक पुण्य और शुभ माना जाता है। इस दिन चढ़ाए गए दान से कई गुना अधिक पुण्य मिलता है। यहां कुछ सामान दिए गए हैं जिन्हें इस दिन दान किया जा सकता है:

1. खाद्य पदार्थ: चावल, गेहूँ, फल, सब्जियाँ, पके हुए भोजन।
2. वस्त्र: नए कपड़े, गर्म कपड़े, कंबल, शॉल।
3. धन: मंदिरों, धर्मार्थ संस्थाओं या जरूरतमंदों को दान देना।
4. धार्मिक वस्त्र: आध्यात्मिक पुस्तकें, पूजा सामग्री जैसे अगरबत्ती, दीपक आदि।
5. आश्रय और सहायता: निराश्रितों के लिए आश्रय, पशु देखभाल और गौ सेवा।

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