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तारा जयंती 2026 – तिथि, महत्व, पूजा विधि और व्रत नियम

श्री सस्वता एस.|शुक्र - 27 फ़र॰ 2026|3 मिनट पढ़ें

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हिंदू धर्म में माँ तारा को दस महाविद्याओं में से एक प्रमुख स्वरूप माना जाता है। तारा जयंती का पर्व माँ तारा के अवतरण दिवस के रूप में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। यह दिन विशेष रूप से तांत्रिक साधना, आध्यात्मिक उन्नति और भय से मुक्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। भक्तजन इस दिन माँ तारा की पूजा कर जीवन की बाधाओं, भय और संकटों से रक्षा की प्रार्थना करते हैं।

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माँ तारा का स्वरूप और महत्व

माँ तारा को करुणा, संरक्षण और ज्ञान की देवी माना जाता है। उनका स्वरूप उग्र भी है और अत्यंत करुणामयी भी। वे साधक को कठिन परिस्थितियों से पार लगाती हैं। ‘तारा’ शब्द का अर्थ है – पार लगाने वाली। जैसे नाविक नदी पार कराता है, वैसे ही माँ तारा भक्तों को जीवन के संकटों से पार कराती हैं।

तंत्र शास्त्रों में माँ तारा को अत्यंत शक्तिशाली देवी बताया गया है। उनका स्वरूप माँ काली से मिलता-जुलता है, परंतु वे ज्ञान और वाणी की अधिष्ठात्री भी मानी जाती हैं। माना जाता है कि सच्ची श्रद्धा से उनकी उपासना करने पर साधक को आध्यात्मिक सिद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

तारा जयंती की पौराणिक कथा

न्यता है कि समुद्र मंथन के समय जब भगवान शिव ने हलाहल विष पान किया, तब वे अचेत हो गए। उस समय माँ तारा ने प्रकट होकर उन्हें अपनी गोद में लिया और उन्हें स्तनपान कराया, जिससे विष का प्रभाव शांत हो गया। इस कथा के माध्यम से माँ तारा को जीवनदायिनी और रक्षक के रूप में देखा जाता है।

यह कथा इस बात का प्रतीक है कि जब जीवन में विष जैसे कष्ट आते हैं, तब माँ तारा अपनी करुणा से उन्हें दूर करती हैं और नई ऊर्जा प्रदान करती हैं।

पूजा विधि

तारा जयंती के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के पूजा स्थान पर माँ तारा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। लाल या नीले पुष्प अर्पित करें, धूप-दीप जलाएं और माँ को प्रसाद अर्पित करें। “ॐ ह्रीं स्त्रीं हूं फट्” मंत्र का जप विशेष फलदायी माना जाता है।

कुछ साधक इस दिन विशेष तांत्रिक साधना भी करते हैं, परंतु सामान्य भक्तजन साधारण पूजा और मंत्र जप से भी माँ की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। रात्रि में जागरण और स्तोत्र पाठ का भी विशेष महत्व है।

आध्यात्मिक लाभ

तारा जयंती का व्रत और पूजा करने से मानसिक भय, शत्रु बाधा और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। यह पर्व आत्मविश्वास, साहस और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक है। जो लोग जीवन में अस्थिरता या मानसिक तनाव का अनुभव कर रहे हों, उनके लिए माँ तारा की उपासना अत्यंत लाभकारी मानी जाती है।

भक्तों का विश्वास है कि माँ तारा की कृपा से जीवन में संतुलन, ज्ञान और शक्ति का संचार होता है। वे साधक को भीतर से मजबूत बनाती हैं और कठिन समय में मार्गदर्शन देती हैं।

निष्कर्ष

तारा जयंती केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आत्मशक्ति को जागृत करने का अवसर है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि जब जीवन में अंधकार छा जाए, तब माँ तारा प्रकाश बनकर मार्ग दिखाती हैं। श्रद्धा, विश्वास और सच्चे मन से की गई उपासना से माँ तारा अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं और जीवन को सुख, शांति और सफलता से भर देती हैं।







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