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आज का पंचांग

उत्सव पंचांग - सटीक, प्रामाणिक और परंपरा में निहित

आज - 14 सित॰ 2026

सित॰

14

सोम

शुक्ल Paksha - तृतीया

सोमवार

panchang
flower

शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त

11:33 AM से 12:18 PM

अमृत काल

6:37 AM से 8:24 AM

ब्रह्म मुहूर्त

4:20 AM से 5:08 AM

flower

अशुभ मुहूर्त

राहु काल

7:23 AM से 8:53 AM

यमगंड

10:24 AM से 11:55 AM

गुलिका

1:26 PM से 2:57 PM

दुर्मुहूर्त

12:18 PM से 1:04 PM

वर्ज्यम

6:09 AM से 7:56 AM

flower

सूर्योदय

5:52 AM

सूर्यास्त

5:58 PM

चंद्रोदय

8:15 AM

चंद्रास्त

7:51 PM

तिथि

तृतीया

13 सित॰ 2026 1:40 am से 14 सित॰ 2026 1:36 am

चतुर्थी

14 सित॰ 2026 1:37 am से 15 सित॰ 2026 2:13 am

नक्षत्र

चित्रा

13 सित॰ 2026 7:38 am से 14 सित॰ 2026 8:24 am

स्वाति

14 सित॰ 2026 8:25 am से 15 सित॰ 2026 9:49 am

कर्ण

गर

13 सित॰ 2026 1:34 pm से 14 सित॰ 2026 1:36 am

वणिज

14 सित॰ 2026 1:37 am से 14 सित॰ 2026 1:50 pm

विष्टि

14 सित॰ 2026 1:51 pm से 15 सित॰ 2026 2:13 am

योग

ब्रह्म

13 सित॰ 2026 8:13 am से 14 सित॰ 2026 7:15 am

इंद्र

14 सित॰ 2026 7:16 am से 15 सित॰ 2026 6:48 am

आगामी त्योहार

सित॰

15

ऋषि पंचमी

"पंचमी तिथि प्रारम्भ - प्रातः 07:44, 15 सितम्बर, 2026 पंचमी तिथि समाप्त - प्रातः 08:59, 16 सितम्बर, 2026" ऋषियों का सम्मान करने और अतीत की भूलों व नकारात्मक कर्मों से शुद्धि पाने हेतु मनाया जाता है।

सित॰

16

स्कंद षष्ठी

"प्रारंभ - सुबह 08:59, 16 सितंबर समाप्त - सुबह 10:47, 17 सितंबर" भगवान कार्तिकेय को साहस, विजय, अनुशासन और आध्यात्मिक शक्ति के लिए समर्पित।

सित॰

17

ज्येष्ठा गौरी आवाहन

"अनुराधा नक्षत्र प्रारम्भ - शाम 05:22, 16 सितम्बर, 2026 अनुराधा नक्षत्र समाप्त - शाम 07:53, 17 सितम्बर, 2026" समृद्धि और पारिवारिक सुख के आशीर्वाद हेतु देवी गौरी का घरों में स्वागत करने का एक पारंपरिक अनुष्ठान।

सित॰

17

विश्वकर्मा पूजा

देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा को समर्पित, जिनकी पूजा कार्य, मशीनरी, औजारों और शिल्प कौशल में सफलता के लिए की जाती है।

सित॰

17

कन्या संक्रान्ति

यह सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश का प्रतीक है और इसे आध्यात्मिक अनुष्ठानों व दान-पुण्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

सित॰

19

दूर्वा अष्टमी पूजा

"अष्टमी तिथि प्रारम्भ - दोपहर 01:00 बजे, 18 सितम्बर, 2026 अष्टमी तिथि समाप्त - दोपहर 03:26 बजे, 19 सितम्बर, 2026" सुरक्षा, समृद्धि और पारिवारिक कल्याण के लिए दूर्वा घास और देवी शक्ति की पूजा को समर्पित।

सित॰

19

मासिक दुर्गाष्टमी (भाद्र मास विशेष)

"प्रारंभ - अपराह्न 01:00, 18 सितंबर समाप्त - अपराह्न 03:26, 19 सितंबर" शक्ति, रक्षा और नकारात्मकता को दूर करने के लिए देवी दुर्गा को समर्पित एक मासिक व्रत।

सित॰

19

ज्येष्ठ गौरी विसर्जन

"मूल नक्षत्र प्रारम्भ - 18 सितम्बर 2026 को रात्रि 10:44 मूल नक्षत्र समाप्त - 20 सितम्बर 2026 को प्रातः 01:43" यह समृद्धि और खुशी के आशीर्वाद हेतु प्रार्थनाओं और उत्सवों के बाद देवी गौरी की औपचारिक विदाई का प्रतीक है।

सित॰

21

दशावतार व्रत

दशमी तिथि प्रारम्भ - 05:51 सायं, 20 सितम्बर, 2026 दशमी तिथि समाप्त - 08:00 रात्रि, 21 सितम्बर, 2026 आध्यात्मिक सुरक्षा और दिव्य आशीर्वाद हेतु भगवान विष्णु के दस अवतारों को समर्पित एक पवित्र व्रत।

सित॰

22

पार्श्व एकादशी

"एकादशी तिथि प्रारम्भ - 21 सितम्बर, 2026 को रात्रि 08:00 बजे एकादशी तिथि समाप्त - 22 सितम्बर, 2026 को रात्रि 09:43 बजे" भगवान विष्णु को समर्पित एक अत्यंत शुभ एकादशी, जो पापों को दूर करने और आध्यात्मिक जागृति में सहायक मानी जाती है।


उत्सव ऑनलाइन पंचांग - आपका प्रमाणिक वैदिक कैलेंडर

उत्सव पंचांग एक परिष्कृत हिंदू कैलेंडर है जिसका उपयोग वैदिक समयपालन के लिए किया जाता है। यह केवल एक तिथि ट्रैकर नहीं है, बल्कि पंचांग एक विशेष खगोलीय गणना प्रणाली के रूप में कार्य करता है, जिसे दिन के चक्र के भीतर सबसे अनुकूल (शुभ) और प्रतिकूल (अशुभ) क्षणों को प्रकट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

संस्कृत शब्द ‘पंचांगम’ का अर्थ है ‘पाँच अंग’ (पंच = पाँच, अंग = भाग)। यह प्राचीन उपकरण ज्योतिषियों और आध्यात्मिक साधकों के लिए अत्यंत आवश्यक है, जो अपनी दैनिक गतिविधियों को ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ संरेखित करना चाहते हैं। सूर्य और चंद्रमा की स्थितियों को ट्रैक करके, पंचांग केवल सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त तक सीमित न रहते हुए उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण खगोलीय जानकारी प्रदान करता है।

भौगोलिक सटीकता: स्थान क्यों मायने रखता है

पंचांग पृथ्वी पर किसी विशिष्ट स्थान के सापेक्ष खगोलीय स्थितियों पर आधारित होकर कार्य करता है। परिणामस्वरूप, इसका विवरण केवल उसी भौगोलिक क्षेत्र के लिए सटीक होता है, जिसके लिए इसकी गणना की जाती है। उत्सव पंचांग आपके वर्तमान शहर के निर्देशांकों का उपयोग करके गतिशील रूप से उत्पन्न होता है, जिससे महत्वपूर्ण समयों के लिए उच्चतम सटीकता सुनिश्चित की जा सके। सभी ज्योतिषीय अवधियों की शुरुआत और समाप्ति सीधे स्थानीय क्षितिज और सौर चक्र से जुड़ी होती है।

पंचांग के पाँच आवश्यक अंग

दैनिक पंचांग का आधार पाँच मुख्य खगोलीय घटकों पर टिका होता है:

  • तिथि (Lunar Day): यह सूर्य और चंद्रमा के बीच कोणीय अंतर को मापती है। यह सभी हिंदू त्योहारों और उपवासों की तिथियाँ निर्धारित करने का प्राथमिक कारक है।
  • नक्षत्र (Star Constellation): यह राशि चक्र के 27 निश्चित नक्षत्रों में से किसी एक में चंद्रमा की स्थिति द्वारा निर्धारित किया जाता है। इसका उपयोग नामकरण जैसे संस्कारों और अनुकूलता के आकलन के लिए किया जाता है।
  • वार (Weekday): यह एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक की समयावधि होती है, जिस पर सात ग्रहों में से एक का शासन होता है।
  • योग (Union): सूर्य और चंद्रमा के संयुक्त देशांतर से उत्पन्न 27 योग होते हैं, जो दिन के समग्र स्वभाव और प्रभाव को दर्शाते हैं।
  • करण (Half-Tithi): यह एक तिथि का आधा भाग होता है। ग्यारह करणों में से विशेष रूप से विष्टि करण से बचने पर जोर दिया जाता है, जिसे नई शुरुआत के लिए अत्यंत अशुभ माना जाता है।
शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

पाँच प्रमुख पंचांग तत्वों को आकाशीय समयों के साथ जोड़कर निम्नलिखित विशिष्ट मुहूर्त निर्धारित किए जाते हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त: यह अत्यंत पवित्र समय भोर से पहले होता है और ध्यान, साधना तथा अध्ययन प्रारंभ करने के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
  • संध्या काल (प्रातः, मध्याह्न, सायाह्न): ये दिन के तीन निर्धारित काल होते हैं, जिनमें हिंदू धर्म के अनुयायी पारंपरिक रूप से अपनी दैनिक धार्मिक प्रार्थनाएँ और अनुष्ठान करते हैं।
  • अभिजीत मुहूर्त: यह दोपहर के आसपास का स्वाभाविक रूप से अनुकूल समय होता है। यदि कोई अन्य शुभ मुहूर्त उपलब्ध न हो, तो यह अवधि महत्वपूर्ण कार्य आरंभ करने के लिए एक शक्तिशाली विकल्प के रूप में कार्य करती है।
  • विजय मुहूर्त: यात्रा प्रारंभ करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाने वाला यह समय सफलता और उद्देश्य की प्राप्ति की संभावना को बढ़ाता है।
  • राहु काल: यह प्रत्येक दिन की एक विशिष्ट अशुभ अवधि होती है, जिसमें किसी भी नए या महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत से पूरी तरह बचना चाहिए।
  • संकल्प: किसी भी औपचारिक पूजा का एक अभिन्न अंग, जिसमें समय और स्थान को स्थापित करने हेतु पंचांग के पाँचों अंगों तथा प्रमुख ग्रह स्थितियों (विशेष रूप से सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति) का उच्चारण किया जाता है।

उत्सव पंचांग का दैनिक संदर्भ लेकर, आप नकारात्मक ग्रह प्रभावों को कम करते हुए तथा समृद्धि और आध्यात्मिक विकास के अवसरों को अधिकतम करते हुए अपने दिन की रणनीतिक योजना बना सकते हैं।

सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न