आज का पंचांग

उत्सव पंचांग - सटीक, प्रामाणिक और परंपरा में निहित

आज - 06 अक्टू॰ 2026

अक्टू॰

06

मंगल

कृष्ण Paksha - एकादशी

मंगलवार

panchang
flower

शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त

6:14 AM से 7:02 AM

ब्रह्म मुहूर्त

11:07 PM से 11:55 PM

flower

अशुभ मुहूर्त

राहु काल

9:35 AM से 11:04 AM

यमगंड

3:41 AM से 5:09 AM

गुलिका

6:38 AM से 8:07 AM

flower

सूर्योदय

12:43 AM

सूर्यास्त

12:33 PM

चंद्रोदय

8:21 PM

चंद्रास्त

9:48 AM

तिथि

एकादशी

05 अक्टू॰ 2026 8:38 pm से 06 अक्टू॰ 2026 7:04 pm

द्वादशी

06 अक्टू॰ 2026 7:05 pm से 07 अक्टू॰ 2026 5:46 pm

नक्षत्र

आश्लेषा

05 अक्टू॰ 2026 5:39 pm से 06 अक्टू॰ 2026 4:46 pm

मघा

06 अक्टू॰ 2026 4:47 pm से 07 अक्टू॰ 2026 4:09 pm

कर्ण

बव

05 अक्टू॰ 2026 8:38 pm से 06 अक्टू॰ 2026 7:48 am

बालव

06 अक्टू॰ 2026 7:50 am से 06 अक्टू॰ 2026 7:04 pm

कौलव

06 अक्टू॰ 2026 7:05 pm से 07 अक्टू॰ 2026 6:23 am

योग

सिद्ध

05 अक्टू॰ 2026 4:21 am से 06 अक्टू॰ 2026 1:49 am

साध्य

06 अक्टू॰ 2026 1:50 am से 06 अक्टू॰ 2026 11:29 pm

शुभ

06 अक्टू॰ 2026 11:30 pm से 07 अक्टू॰ 2026 9:21 pm

आगामी त्योहार

अक्टू॰

08

Guru Pradosh Vrat

"Trayodashi Tithi Begins - 11:16 PM on Oct 07, 2026 Trayodashi Tithi Ends - 10:15 PM on Oct 08, 2026" When the Pradosh Vrat (Trayodashi tithi) falls on a Thursday, it is celebrated as Guru Pradosh. Dedicated to Lord Shiva, the alignment with Thursday strengthens the planet Jupiter in one's horoscope. It blesses the devotee with spiritual knowledge, wisdom, success, and victory over challenges.

अक्टू॰

09

Masik Shivratri (Ashwin Mash Visesh)

"Begins - 10:15 PM, Oct 08 Ends - 09:35 PM, Oct 09" Observed on the Chaturdashi of every Krishna paksha, the monthly Shivratri in the month of Ashwin features special four-prahar prayers dedicated to Lord Shiva and Goddess Parvati. Devotees who observe this fast find fulfillment of their wishes and enjoy a harmonious, blissful married life.

अक्टू॰

10

महालय अमावस्या

प्रारंभ - रात्रि 09:35, 09 अक्टूबर समाप्त - रात्रि 09:19, 10 अक्टूबर पितृ पक्ष के अंतिम दिन को चिह्नित करते हुए, महालय अमावस्या हिंदू महीने का कृष्ण पक्ष का दिन है। यह उन सभी ज्ञात और अज्ञात पूर्वजों के लिए श्राद्ध और तर्पण करने हेतु समर्पित है, जिनकी पुण्यतिथि ज्ञात नहीं है। इसके ठीक अगले दिन से शारदीय नवरात्रि का भव्य शुभारंभ होता है।

अक्टू॰

12

Navratri Begins

"Pratipada Tithi Begins - 09:19 PM on Oct 10, 2026 Pratipada Tithi Ends - 09:30 PM on Oct 11, 2026" Beginning on the Pratipada tithi of Ashwin Shukla paksha, Sharad Navratri is a vibrant nine-day festival. It begins with Ghatasthapana (sacred pot installation) followed by devout worship of the nine distinct forms of Goddess Durga. It fills the atmosphere with spirituality, symbolizing the victory of good over evil.

अक्टू॰

14

Kapardisha Chaturthi

"Chaturthi Tithi Begins - 11:27 PM on Oct 13, 2026 Chaturthi Tithi Ends - 01:13 AM on Oct 15, 2026"

अक्टू॰

15

Lalita Panchami

"Panchami Tithi Begins - 01:13 AM on Oct 15, 2026 Panchami Tithi Ends - 03:25 AM on Oct 16, 2026" Celebrated on the fifth day of Navratri, this day is dedicated to Goddess Lalita (Tripura Sundari), one of the ten Mahavidyas. Worshipping her and fasting on this day bestows supreme joy, material prosperity, and mental peace. Her form is highly compassionate, protecting devotees from all miseries.

अक्टू॰

16

Skanda Sasthi

"Begins - 03:25 AM, Oct 16 Ends - 05:54 AM, Oct 17" Falling on Ashwin Shukla Sasthi, this day is dedicated to worshipping Lord Kartikeya (Skanda), the commander-in-chief of the gods and son of Shiva and Parvati. Deeply revered in South India, this fast is observed to bless children with good health, while instilling courage and valor in the devotee.

अक्टू॰

16

Saraswati Avahan

"Mula Nakshatra Begins - 06:47 AM on Oct 16, 2026 Mula Nakshatra Ends - 09:47 AM on Oct 17, 2026" Observed on the Maha Saptami of Sharad Navratri under the Mula nakshatra, this ritual invokes Goddess Saraswati to descend upon the place of worship. Popular in Maharashtra and South Indian states, it marks the sacred beginning of the Saraswati Puja rituals and the traditional blessing of books.

अक्टू॰

17

Saraswati Puja

"Purva Ashadha Nakshatra Begins - 09:47 AM on Oct 17, 2026 Purva Ashadha Nakshatra Ends - 12:49 PM on Oct 18, 2026" Celebrated during the concluding days of Navratri under the Poorvashadha or Uttarashadha nakshatras, this day centers on worshipping the goddess of knowledge. Students, artists, and musicians place their books, pens, and instruments at the feet of Goddess Saraswati to dispel ignorance and invite intellectual light.

अक्टू॰

17

Tula Sankranti

This festival marks the exact celestial transit of the Sun from Virgo into Libra. Celebrated prominently in Odisha and Karnataka, farming communities welcome it as a harvest festival (such as Kaveri Sankramana). Taking a holy dip in sacred rivers and performing charity holds immense spiritual merit.


आगामी पूजा

Budhvar Visesh Sri Siddhivinayak Ganpati Weekly Raksha Sutra Shringar Arpan Seva - Utsav Puja

14 Weeks Daan Recommended

Budhvar Visesh Sri Siddhivinayak Ganpati Weekly Raksha Sutra Shringar Arpan Seva

Sri Siddhivinayak Mandir, Ujjain

बुध - 07 अक्टू॰ 2026 - Budhvar Visesh

1.1k+ भक्त

पूजा करें
Budhwar Vishesh Saubhagya Lambodara Ganapati Weekly Ketu Shanti Sarpa Shringar Seva - Utsav Puja

7 Weeks Daan Recommended

Budhwar Vishesh Saubhagya Lambodara Ganapati Weekly Ketu Shanti Sarpa Shringar Seva

Saubhagya Ganpati Mandir, Prayagraj

बुध - 07 अक्टू॰ 2026 - Budhvar Visesh

1.0k+ भक्त

पूजा करें
अघोरी उच्छिष्ट गणपति महा तंत्र युक्त भस्म आहुति हवन - Utsav Puja

🔴 रिश्तों में सामंजस्य और समस्याओं के निवारण के लिए पूजा

अघोरी उच्छिष्ट गणपति महा तंत्र युक्त भस्म आहुति हवन

उच्छिष्ट गणपति मंदिर, Ujjain

बुध - 07 अक्टू॰ 2026 - Budhvar Visesh

1.0k+ भक्त

पूजा करें
अष्टविनायक मयूरेश्वर इच्छापूर्ति विनायक सर्व मनोकामना पूर्ति अभिषेक पूजा - Utsav Puja

🔴 सपनों की नौकरी और साक्षात्कार में सफलता के लिए पूजा

अष्टविनायक मयूरेश्वर इच्छापूर्ति विनायक सर्व मनोकामना पूर्ति अभिषेक पूजा

मयूरेश्वर गणपति मंदिर, Morgaon

बुध - 07 अक्टू॰ 2026 - Budhvar Visesh

1.1k+ भक्त

पूजा करें
उच्छिष्ट गणपति तांत्रिक घृत-स्नेहम मधुरस महा अभिषेक - Utsav Puja

🔴 आकस्मिक धन और दैवीय सुरक्षा के लिए तांत्रिक पूजा

उच्छिष्ट गणपति तांत्रिक घृत-स्नेहम मधुरस महा अभिषेक

उच्छिष्ट गणपति मंदिर, Ujjain

बुध - 07 अक्टू॰ 2026 - Budhvar Visesh

8.3k+ भक्त

पूजा करें
उच्छिष्ट गणपति तांत्रिक घृत-स्नेहम मधुरस महा अभिषेक - Utsav Puja

🔴 आकस्मिक धन और दैवीय सुरक्षा के लिए तांत्रिक पूजा

उच्छिष्ट गणपति तांत्रिक घृत-स्नेहम मधुरस महा अभिषेक

उच्छिष्ट गणपति मंदिर, Ujjain

बुध - 07 अक्टू॰ 2026 - Budhvar Visesh

7.3k+ भक्त

पूजा करें
उच्छिष्ट गणपति तांत्रिक घृत-स्नेहम मधुरस महा अभिषेक - Utsav Puja

🔴 आकस्मिक धन और दैवीय सुरक्षा के लिए तांत्रिक पूजा

उच्छिष्ट गणपति तांत्रिक घृत-स्नेहम मधुरस महा अभिषेक

उच्छिष्ट गणपति मंदिर, Ujjain

बुध - 07 अक्टू॰ 2026 - Budhvar Visesh

6.2k+ भक्त

पूजा करें
चिंतामणि गणेश काशी विशेष अर्चना पूजा - Utsav Puja

करियर में वृद्धि, प्रसिद्धि और धन के लिए पूजा

चिंतामणि गणेश काशी विशेष अर्चना पूजा

चिंतामण गणेश, Kashi

बुध - 07 अक्टू॰ 2026 - Budhvar Visesh

1.0k+ भक्त

पूजा करें
चिंतामणि गणेश विघ्नहरण केतु शांति महा पूजा - Utsav Puja

पितृ श्राप से मुक्ति और संघर्षों को सफलता में बदलने हेतु पूजा।

चिंतामणि गणेश विघ्नहरण केतु शांति महा पूजा

चिंतामण गणेश, Kashi

बुध - 07 अक्टू॰ 2026 - Budhvar Visesh

1.0k+ भक्त

पूजा करें
चिंतामणि गणेश विशेष 1008 गणेश सहस्र अर्चना पाठ और केतु शांति पूजा - Utsav Puja

करियर में उन्नति, प्रसिद्धि और धन के लिए पूजा

चिंतामणि गणेश विशेष 1008 गणेश सहस्र अर्चना पाठ और केतु शांति पूजा

चिंतामण गणेश, Kashi

बुध - 07 अक्टू॰ 2026 - Budhvar Visesh

9.9k+ भक्त

पूजा करें

उत्सव ऑनलाइन पंचांग - आपका प्रमाणिक वैदिक कैलेंडर

उत्सव पंचांग एक परिष्कृत हिंदू कैलेंडर है जिसका उपयोग वैदिक समयपालन के लिए किया जाता है। यह केवल एक तिथि ट्रैकर नहीं है, बल्कि पंचांग एक विशेष खगोलीय गणना प्रणाली के रूप में कार्य करता है, जिसे दिन के चक्र के भीतर सबसे अनुकूल (शुभ) और प्रतिकूल (अशुभ) क्षणों को प्रकट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

संस्कृत शब्द ‘पंचांगम’ का अर्थ है ‘पाँच अंग’ (पंच = पाँच, अंग = भाग)। यह प्राचीन उपकरण ज्योतिषियों और आध्यात्मिक साधकों के लिए अत्यंत आवश्यक है, जो अपनी दैनिक गतिविधियों को ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ संरेखित करना चाहते हैं। सूर्य और चंद्रमा की स्थितियों को ट्रैक करके, पंचांग केवल सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त तक सीमित न रहते हुए उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण खगोलीय जानकारी प्रदान करता है।

भौगोलिक सटीकता: स्थान क्यों मायने रखता है

पंचांग पृथ्वी पर किसी विशिष्ट स्थान के सापेक्ष खगोलीय स्थितियों पर आधारित होकर कार्य करता है। परिणामस्वरूप, इसका विवरण केवल उसी भौगोलिक क्षेत्र के लिए सटीक होता है, जिसके लिए इसकी गणना की जाती है। उत्सव पंचांग आपके वर्तमान शहर के निर्देशांकों का उपयोग करके गतिशील रूप से उत्पन्न होता है, जिससे महत्वपूर्ण समयों के लिए उच्चतम सटीकता सुनिश्चित की जा सके। सभी ज्योतिषीय अवधियों की शुरुआत और समाप्ति सीधे स्थानीय क्षितिज और सौर चक्र से जुड़ी होती है।

पंचांग के पाँच आवश्यक अंग

दैनिक पंचांग का आधार पाँच मुख्य खगोलीय घटकों पर टिका होता है:

  • तिथि (Lunar Day): यह सूर्य और चंद्रमा के बीच कोणीय अंतर को मापती है। यह सभी हिंदू त्योहारों और उपवासों की तिथियाँ निर्धारित करने का प्राथमिक कारक है।
  • नक्षत्र (Star Constellation): यह राशि चक्र के 27 निश्चित नक्षत्रों में से किसी एक में चंद्रमा की स्थिति द्वारा निर्धारित किया जाता है। इसका उपयोग नामकरण जैसे संस्कारों और अनुकूलता के आकलन के लिए किया जाता है।
  • वार (Weekday): यह एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक की समयावधि होती है, जिस पर सात ग्रहों में से एक का शासन होता है।
  • योग (Union): सूर्य और चंद्रमा के संयुक्त देशांतर से उत्पन्न 27 योग होते हैं, जो दिन के समग्र स्वभाव और प्रभाव को दर्शाते हैं।
  • करण (Half-Tithi): यह एक तिथि का आधा भाग होता है। ग्यारह करणों में से विशेष रूप से विष्टि करण से बचने पर जोर दिया जाता है, जिसे नई शुरुआत के लिए अत्यंत अशुभ माना जाता है।
शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

पाँच प्रमुख पंचांग तत्वों को आकाशीय समयों के साथ जोड़कर निम्नलिखित विशिष्ट मुहूर्त निर्धारित किए जाते हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त: यह अत्यंत पवित्र समय भोर से पहले होता है और ध्यान, साधना तथा अध्ययन प्रारंभ करने के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
  • संध्या काल (प्रातः, मध्याह्न, सायाह्न): ये दिन के तीन निर्धारित काल होते हैं, जिनमें हिंदू धर्म के अनुयायी पारंपरिक रूप से अपनी दैनिक धार्मिक प्रार्थनाएँ और अनुष्ठान करते हैं।
  • अभिजीत मुहूर्त: यह दोपहर के आसपास का स्वाभाविक रूप से अनुकूल समय होता है। यदि कोई अन्य शुभ मुहूर्त उपलब्ध न हो, तो यह अवधि महत्वपूर्ण कार्य आरंभ करने के लिए एक शक्तिशाली विकल्प के रूप में कार्य करती है।
  • विजय मुहूर्त: यात्रा प्रारंभ करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाने वाला यह समय सफलता और उद्देश्य की प्राप्ति की संभावना को बढ़ाता है।
  • राहु काल: यह प्रत्येक दिन की एक विशिष्ट अशुभ अवधि होती है, जिसमें किसी भी नए या महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत से पूरी तरह बचना चाहिए।
  • संकल्प: किसी भी औपचारिक पूजा का एक अभिन्न अंग, जिसमें समय और स्थान को स्थापित करने हेतु पंचांग के पाँचों अंगों तथा प्रमुख ग्रह स्थितियों (विशेष रूप से सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति) का उच्चारण किया जाता है।

उत्सव पंचांग का दैनिक संदर्भ लेकर, आप नकारात्मक ग्रह प्रभावों को कम करते हुए तथा समृद्धि और आध्यात्मिक विकास के अवसरों को अधिकतम करते हुए अपने दिन की रणनीतिक योजना बना सकते हैं।

सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न