आज का पंचांग

उत्सव पंचांग - सटीक, प्रामाणिक और परंपरा में निहित

आज - 17 मार्च 2026

मार्च

17

मंगल

Krishna Paksha - Trayodashi

मंगलवार

panchang
flower

शुभ मुहूर्त

Abhijit Muhurat

6:22 AM से 7:07 AM

Amrit Kaal

1:28 AM से 3:15 AM

Brahma Muhurat

11:11 PM से 11:59 PM

flower

अशुभ मुहूर्त

Rahu Kaal

9:45 AM से 11:15 AM

Yamaganda

3:44 AM से 5:14 AM

Gulika

6:44 AM से 8:15 AM

Dur Muhurat

7:07 AM से 7:53 AM

Varjyam

6:09 AM से 7:56 AM

flower

सूर्योदय

12:43 AM

सूर्यास्त

12:45 PM

चंद्रोदय

11:33 PM

चंद्रास्त

11:10 AM

तिथि

Trayodashi

16 मार्च 2026 4:12 am से 17 मार्च 2026 3:52 am

Chaturdashi

17 मार्च 2026 3:53 am से 18 मार्च 2026 2:54 am

नक्षत्र

Dhanishta

16 मार्च 2026 2:05 am से 17 मार्च 2026 2:26 am

Shatabhisha

17 मार्च 2026 2:27 am से 18 मार्च 2026 2:11 am

कर्ण

Vanija

16 मार्च 2026 4:08 pm से 17 मार्च 2026 3:52 am

Vishti

17 मार्च 2026 3:53 am से 17 मार्च 2026 3:28 pm

Naga

17 मार्च 2026 3:29 pm से 18 मार्च 2026 2:54 am

योग

Siddha

16 मार्च 2026 7:09 am से 17 मार्च 2026 5:41 am

Sadhya

17 मार्च 2026 5:42 am से 18 मार्च 2026 3:44 am

आगामी त्योहार

मार्च

18

दर्श अमावस्या

"प्रारंभ – 18 मार्च को सुबह 08:25 बजे समाप्त – 19 मार्च को सुबह 06:52 बजे" पितृ तर्पण, दान-पुण्य और साधना का अमावस्या दिन।

मार्च

19

चैत्र नवरात्रि प्रारंभ

"प्रतिपदा तिथि प्रारंभ – 19 मार्च 2026 को सुबह 06:52 बजे प्रतिपदा तिथि समाप्त – 20 मार्च 2026 को सुबह 04:52 बजे" देवी दुर्गा की नौ दिवसीय उपासना का आरंभ।

मार्च

19

उगादी

"प्रतिपदा तिथि प्रारंभ – 19 मार्च 2026 को सुबह 06:52 बजे प्रतिपदा तिथि समाप्त – 20 मार्च 2026 को सुबह 04:52 बजे" आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक का नववर्ष पर्व।

मार्च

19

गुड़ी पड़वा

"प्रतिपदा तिथि प्रारंभ – 19 मार्च 2026 को सुबह 06:52 बजे प्रतिपदा तिथि समाप्त – 20 मार्च 2026 को सुबह 04:52 बजे" मराठी नववर्ष, शुभ आरंभ और समृद्धि का प्रतीक।

मार्च

21

मत्स्य जयंती

"तृतीया तिथि प्रारंभ – 21 मार्च 2026 को सुबह 02:30 बजे तृतीया तिथि समाप्त – 21 मार्च 2026 को रात 11:56 बजे " भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार का पर्व।

मार्च

21

गौरी पूजा

"तृतीया तिथि प्रारंभ – 21 मार्च 2026 को सुबह 02:30 बजे तृतीया तिथि समाप्त – 21 मार्च 2026 को रात 11:56 बजे " वैवाहिक सुख और पारिवारिक कल्याण हेतु गौरी पूजा।

मार्च

21

गणगौर

"तृतीया तिथि प्रारंभ – 21 मार्च 2026 को सुबह 02:30 बजे तृतीया तिथि समाप्त – 21 मार्च 2026 को रात 11:56 बजे" "यह राजस्थान का प्रमुख स्त्री पर्व है। सुहाग और प्रेम का प्रतीक है।"

मार्च

22

वासुदेव चतुर्थी

"चतुर्थी तिथि प्रारंभ – 21 मार्च 2026 को रात 11:56 बजे चतुर्थी तिथि समाप्त – 22 मार्च 2026 को रात 09:16 बजे" "यह भगवान कृष्ण की पूजा का दिन है। संतान सुख की कामना की जाती है।"

मार्च

23

लक्ष्मी पंचमी

"पंचमी तिथि प्रारंभ – 22 मार्च 2026 को रात 09:16 बजे पंचमी तिथि समाप्त – 23 मार्च 2026 को शाम 06:38 बजे" "यह देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति का दिन है। समृद्धि और वैभव के लिए पूजा होती है।"

मार्च

24

यमुना छठ

"षष्ठी तिथि प्रारंभ – 23 मार्च 2026 को शाम 06:38 बजे षष्ठी तिथि समाप्त – 24 मार्च 2026 को शाम 04:07 बजे" "यह यमुना माता की पूजा का पर्व है। शुद्धता और मोक्ष का प्रतीक है।"


आगामी पूजा

माँ भद्रकाली 108 मुंड माला सेवा एवं विजय समृद्धि बीज मंत्र जाप - Utsav Puja

जीवन में विजय और समृद्धि के लिए पूजा

माँ भद्रकाली 108 मुंड माला सेवा एवं विजय समृद्धि बीज मंत्र जाप

भद्रा काली मंदिर दुर्गाकुंड, Varanasi

बुध - 18 मार्च 2026 - दर्श अमावस्या

1.0k+ भक्त

पूजा करें
Chintamani Ganesh Vighnaharan Ketu Shanti Maha Puja  - Utsav Puja

Puja to Break Ancestral Curses and Turn Struggles into Success.

Chintamani Ganesh Vighnaharan Ketu Shanti Maha Puja

चिंतामण गणेश, Kashi

बुध - 18 मार्च 2026 - बुधवार विशेष

1.0k+ भक्त

पूजा करें
अघोरी उच्छिष्ट गणपति महा तंत्र युक्त भस्म आहुति हवन - Utsav Puja

🔴 रिश्तों में सामंजस्य और समस्याओं के निवारण के लिए पूजा

अघोरी उच्छिष्ट गणपति महा तंत्र युक्त भस्म आहुति हवन

उच्छिष्ट गणपति मंदिर, Ujjain

बुध - 18 मार्च 2026 - बुधवार विशेष

1.0k+ भक्त

पूजा करें
चिंतामणि गणेश काशी विशेष अर्चना पूजा - Utsav Puja

करियर में उन्नति, प्रसिद्धि और धन के लिए पूजा

चिंतामणि गणेश काशी विशेष अर्चना पूजा

चिंतामण गणेश, Kashi

बुध - 18 मार्च 2026 - बुधवार विशेष

1.0k+ भक्त

पूजा करें
चिंतामणि गणेश विशेष 1008 गणेश सहस्र अर्चना पाठ और केतु शांति पूजा - Utsav Puja

करियर में उन्नति, प्रसिद्धि और धन के लिए पूजा

चिंतामणि गणेश विशेष 1008 गणेश सहस्र अर्चना पाठ और केतु शांति पूजा

चिंतामण गणेश, Kashi

बुध - 18 मार्च 2026 - बुधवार विशेष

9.5k+ भक्त

पूजा करें
चिंतामणि गणेश विशेष 1008 गणेश सहस्र अर्चना पाठ और केतु शांति पूजा - Utsav Puja

करियर में उन्नति, प्रसिद्धि और धन के लिए पूजा

चिंतामणि गणेश विशेष 1008 गणेश सहस्र अर्चना पाठ और केतु शांति पूजा

चिंतामण गणेश, Kashi

बुध - 18 मार्च 2026 - बुधवार विशेष

9.6k+ भक्त

पूजा करें
तीन मुखी गणपति बुधवार विशेष भव्य रा-के-श अनुष्ठान - Utsav Puja

राहु, केतु और शनि दोष से मुक्ति पाने के लिए पूजा।

तीन मुखी गणपति बुधवार विशेष भव्य रा-के-श अनुष्ठान

त्रिमुखी गणेश मंदिर, Kashi

बुध - 18 मार्च 2026 - बुधवार विशेष

9.3k+ भक्त

पूजा करें
देव दिवाली विशेष बूढ़ेश्वर महादेव 6000 मूल मंत्र जाप एवं अभिषेक - Utsav Puja

धन, व्यापार वृद्धि और उन्नत बुद्धि के लिए पूजा

देव दिवाली विशेष बूढ़ेश्वर महादेव 6000 मूल मंत्र जाप एवं अभिषेक

बूढ़ेश्वर मंदिर, Prayagraj

बुध - 18 मार्च 2026 - बुधवार विशेष

1.0k+ भक्त

पूजा करें
बुध प्रदोष व्रत विशेष बूढ़ेश्वर महादेव 9000 मूल मंत्र जाप एवं महाअभिषेक - Utsav Puja

सौभाग्य और एकाएक धन प्राप्ति के लिए पूजा

बुध प्रदोष व्रत विशेष बूढ़ेश्वर महादेव 9000 मूल मंत्र जाप एवं महाअभिषेक

बूढ़ेश्वर मंदिर, Prayagraj

बुध - 18 मार्च 2026 - बुधवार विशेष

1.0k+ भक्त

पूजा करें
बुधवार केतु शांति दोष मुक्ति साप्ताहिक दान सेवा - चिंतामणि गणेश - Utsav Puja

2 सप्ताह दान अनुशंसित

बुधवार केतु शांति दोष मुक्ति साप्ताहिक दान सेवा - चिंतामणि गणेश

चिंतामण गणेश, Kashi

बुध - 18 मार्च 2026 - बुधवार विशेष

15.2k+ भक्त

पूजा करें

उत्सव ऑनलाइन पंचांग - आपका प्रमाणिक वैदिक कैलेंडर

उत्सव पंचांग एक परिष्कृत हिंदू कैलेंडर है जिसका उपयोग वैदिक समयपालन के लिए किया जाता है। यह केवल एक तिथि ट्रैकर नहीं है, बल्कि पंचांग एक विशेष खगोलीय गणना प्रणाली के रूप में कार्य करता है, जिसे दिन के चक्र के भीतर सबसे अनुकूल (शुभ) और प्रतिकूल (अशुभ) क्षणों को प्रकट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

संस्कृत शब्द ‘पंचांगम’ का अर्थ है ‘पाँच अंग’ (पंच = पाँच, अंग = भाग)। यह प्राचीन उपकरण ज्योतिषियों और आध्यात्मिक साधकों के लिए अत्यंत आवश्यक है, जो अपनी दैनिक गतिविधियों को ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ संरेखित करना चाहते हैं। सूर्य और चंद्रमा की स्थितियों को ट्रैक करके, पंचांग केवल सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त तक सीमित न रहते हुए उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण खगोलीय जानकारी प्रदान करता है।

भौगोलिक सटीकता: स्थान क्यों मायने रखता है

पंचांग पृथ्वी पर किसी विशिष्ट स्थान के सापेक्ष खगोलीय स्थितियों पर आधारित होकर कार्य करता है। परिणामस्वरूप, इसका विवरण केवल उसी भौगोलिक क्षेत्र के लिए सटीक होता है, जिसके लिए इसकी गणना की जाती है। उत्सव पंचांग आपके वर्तमान शहर के निर्देशांकों का उपयोग करके गतिशील रूप से उत्पन्न होता है, जिससे महत्वपूर्ण समयों के लिए उच्चतम सटीकता सुनिश्चित की जा सके। सभी ज्योतिषीय अवधियों की शुरुआत और समाप्ति सीधे स्थानीय क्षितिज और सौर चक्र से जुड़ी होती है।

पंचांग के पाँच आवश्यक अंग

दैनिक पंचांग का आधार पाँच मुख्य खगोलीय घटकों पर टिका होता है:

  • तिथि (Lunar Day): यह सूर्य और चंद्रमा के बीच कोणीय अंतर को मापती है। यह सभी हिंदू त्योहारों और उपवासों की तिथियाँ निर्धारित करने का प्राथमिक कारक है।
  • नक्षत्र (Star Constellation): यह राशि चक्र के 27 निश्चित नक्षत्रों में से किसी एक में चंद्रमा की स्थिति द्वारा निर्धारित किया जाता है। इसका उपयोग नामकरण जैसे संस्कारों और अनुकूलता के आकलन के लिए किया जाता है।
  • वार (Weekday): यह एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक की समयावधि होती है, जिस पर सात ग्रहों में से एक का शासन होता है।
  • योग (Union): सूर्य और चंद्रमा के संयुक्त देशांतर से उत्पन्न 27 योग होते हैं, जो दिन के समग्र स्वभाव और प्रभाव को दर्शाते हैं।
  • करण (Half-Tithi): यह एक तिथि का आधा भाग होता है। ग्यारह करणों में से विशेष रूप से विष्टि करण से बचने पर जोर दिया जाता है, जिसे नई शुरुआत के लिए अत्यंत अशुभ माना जाता है।
शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

पाँच प्रमुख पंचांग तत्वों को आकाशीय समयों के साथ जोड़कर निम्नलिखित विशिष्ट मुहूर्त निर्धारित किए जाते हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त: यह अत्यंत पवित्र समय भोर से पहले होता है और ध्यान, साधना तथा अध्ययन प्रारंभ करने के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
  • संध्या काल (प्रातः, मध्याह्न, सायाह्न): ये दिन के तीन निर्धारित काल होते हैं, जिनमें हिंदू धर्म के अनुयायी पारंपरिक रूप से अपनी दैनिक धार्मिक प्रार्थनाएँ और अनुष्ठान करते हैं।
  • अभिजीत मुहूर्त: यह दोपहर के आसपास का स्वाभाविक रूप से अनुकूल समय होता है। यदि कोई अन्य शुभ मुहूर्त उपलब्ध न हो, तो यह अवधि महत्वपूर्ण कार्य आरंभ करने के लिए एक शक्तिशाली विकल्प के रूप में कार्य करती है।
  • विजय मुहूर्त: यात्रा प्रारंभ करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाने वाला यह समय सफलता और उद्देश्य की प्राप्ति की संभावना को बढ़ाता है।
  • राहु काल: यह प्रत्येक दिन की एक विशिष्ट अशुभ अवधि होती है, जिसमें किसी भी नए या महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत से पूरी तरह बचना चाहिए।
  • संकल्प: किसी भी औपचारिक पूजा का एक अभिन्न अंग, जिसमें समय और स्थान को स्थापित करने हेतु पंचांग के पाँचों अंगों तथा प्रमुख ग्रह स्थितियों (विशेष रूप से सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति) का उच्चारण किया जाता है।

उत्सव पंचांग का दैनिक संदर्भ लेकर, आप नकारात्मक ग्रह प्रभावों को कम करते हुए तथा समृद्धि और आध्यात्मिक विकास के अवसरों को अधिकतम करते हुए अपने दिन की रणनीतिक योजना बना सकते हैं।

सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न