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आज का पंचांग

उत्सव पंचांग - सटीक, प्रामाणिक और परंपरा में निहित

आज - 29 जन॰ 2026

जन॰

29

गुरु

Shukla Paksha - Ekadashi

गुरुवार

panchang
flower

शुभ मुहूर्त

Abhijit Muhurat

6:41 AM से 7:26 AM

Amrit Kaal

2:25 AM से 4:12 AM

Brahma Muhurat

12:08 AM से 12:56 AM

flower

अशुभ मुहूर्त

Rahu Kaal

8:25 AM से 9:46 AM

Yamaganda

1:40 AM से 3:01 AM

Gulika

4:22 AM से 5:43 AM

Dur Muhurat

7:26 AM से 8:12 AM

Varjyam

6:09 AM से 7:56 AM

flower

सूर्योदय

1:40 AM

सूर्यास्त

12:27 PM

चंद्रोदय

8:30 AM

चंद्रास्त

10:17 PM

तिथि

Ekadashi

28 जन॰ 2026 11:07 am से 29 जन॰ 2026 8:24 am

Dwadashi

29 जन॰ 2026 8:25 am से 30 जन॰ 2026 5:38 am

नक्षत्र

Rohini

28 जन॰ 2026 5:26 am से 29 जन॰ 2026 3:28 am

Mrigashira

29 जन॰ 2026 3:29 am से 30 जन॰ 2026 1:25 am

कर्ण

Vanija

28 जन॰ 2026 11:07 am से 28 जन॰ 2026 9:46 pm

Vishti

28 जन॰ 2026 9:47 pm से 29 जन॰ 2026 8:24 am

Bava

29 जन॰ 2026 8:25 am से 29 जन॰ 2026 7:01 pm

योग

Brahma

28 जन॰ 2026 12:28 am से 28 जन॰ 2026 9:06 pm

Indra

28 जन॰ 2026 9:07 pm से 29 जन॰ 2026 5:39 pm

Vaidhriti

29 जन॰ 2026 5:40 pm से 30 जन॰ 2026 2:10 pm

आगामी त्योहार

जन॰

29

Jaya Ekadashi

"Ekadashi Tithi Begins - 04:35 PM on Jan 28, 2026 Ekadashi Tithi Ends - 01:55 PM on Jan 29, 2026" Jaya Ekadashi grants liberation from sins and is observed through fasting and devotion to Vishnu.

जन॰

30

Shukra Pradosha Vrat

"Trayodashi Tithi Begins - 11:09 AM on Jan 30, 2026 Trayodashi Tithi Ends - 08:25 AM on Jan 31, 2026" This second Shukra Pradosha of the month again honors Lord Shiva for grace and prosperity

जन॰

31

Shani Pradosh Vrat

Pradosh dedicated to Shani Dev

फ़र॰

01

रविवर विशेष

सूर्य देव और भैरव को समर्पित दिन

फ़र॰

01

माघी पूर्णिमा

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ – 01 फ़रवरी 2026, सुबह 05:52 बजे पूर्णिमा तिथि समाप्त – 02 फ़रवरी 2026, सुबह 03:38 बजे माघ मास की पूर्णिमा, धार्मिक स्नान और पूजा के लिए शुभ दिन।

फ़र॰

01

षोडशी जयंती

"पूर्णिमा तिथि प्रारंभ – 01 फ़रवरी 2026, सुबह 05:52 बजे पूर्णिमा तिथि समाप्त – 02 फ़रवरी 2026, सुबह 03:38 बजे" त्रिपुरा सुंदरी देवी के प्रकट होने का दिवस। शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है।

फ़र॰

01

Sarvartha Siddhi Yog

Sarvartha Siddhi Yoga is a highly auspicious yog in Vedic astrology. The name literally means “fulfillment of all purposes.” Any positive or important work started during this yoga is believed to bring success, prosperity, and favorable results.

फ़र॰

02

सोमवार विशेष

भगवान शिव की आराधना और व्रत का विशेष महत्व।

फ़र॰

05

संकष्टी चतुर्थी

"चतुर्थी तिथि प्रारंभ – 05 फ़रवरी 2026, रात 12:09 बजे चतुर्थी तिथि समाप्त – 06 फ़रवरी 2026, रात 12:22 बजे" विघ्नों को दूर करने हेतु भगवान गणेश को समर्पित व्रत।

फ़र॰

07

यशोदा जयंती

"षष्ठी तिथि प्रारंभ – 07 फ़रवरी 2026, रात 01:18 बजे षष्ठी तिथि समाप्त – 08 फ़रवरी 2026, सुबह 02:54 बजे" भगवान कृष्ण की माता यशोदा का जन्म दिवस।


आगामी पूजा

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अपने पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त करें

गया फल्गु घाट पितृ तर्पण भीष्म अष्टमी विशेष पूजा

गया फल्गु घाट, Gaya

गुरु - 29 जन॰ 2026 - Jaya Ekadashi

1.0k+ भक्त

पूजा करें
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सुखद वैवाहिक जीवन के लिए पुजा

तुलसी विवाह विशेष विष्णु सहस्रनाम तुलसी अर्चना पूजा गया तीर्थ

श्री विष्णु पद मंदिर, Gaya

गुरु - 29 जन॰ 2026 - Jaya Ekadashi

1.1k+ भक्त

पूजा करें
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रिश्तों से जुड़ी समस्याओं और करियर में उन्नति के लिए पूजा

बृहस्पति वक्री विशेष 11000 मूल मंत्र जाप एवं गज मूर्ति चढ़ावा

बृहस्पतिश्वर मंदिर, Kashi

गुरु - 29 जन॰ 2026 - Jaya Ekadashi

1.1k+ भक्त

पूजा करें
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दैवीय सुरक्षा और खुशी के लिए पूजा

राधा दामोदर मंदिर वृन्दावन राधाष्टमी विशेष सुख समृद्धि महापूजा

राधा दामोदर मंदिर, Vrindavan

गुरु - 29 जन॰ 2026 - Jaya Ekadashi

1.0k+ भक्त

पूजा करें
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मूलांक 1,3,5,6 के लिए विशेष पूजा

श्री दीर्घ विष्णु सत्यनारायण व्रत कथा एवं पीला वस्त्र दान

दीर्घ विष्णु मंदिर, Mathura

गुरु - 29 जन॰ 2026 - Jaya Ekadashi

1.1k+ भक्त

पूजा करें
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पितृ दोष से मुक्ति प्राप्त करें और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त करें

हरिद्वार गंगा घाट विशेष श्राद्ध पूजा

हर की पौड़ी, Haridwar

गुरु - 29 जन॰ 2026 - Jaya Ekadashi

3.1k+ भक्त

पूजा करें
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धन और समृद्धि विशेष पूजा

1008 लक्ष्मी नारायण मूल मंत्र जाप एवं अमृत राजयोग प्राप्ति कपूर - गुलाब चढ़ावा

लक्ष्मी नारायण मंदिर, Jhansi

गुरु - 29 जन॰ 2026 - Guruvar Visesh

1.0k+ भक्त

पूजा करें
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The 'One Grand Remedy' Puja to Solve 100 Problems.

1008 विष्णु सर्व दोष निवारण मंत्र जाप पीला वस्त्र एवं केला दान

दीर्घ विष्णु मंदिर, Mathura

गुरु - 29 जन॰ 2026 - Guruvar Visesh

1.0k+ भक्त

पूजा करें
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रक्षा और विजय के लिए पूजा

7100 नृसिंह बीज मंत्र जाप एवं 108 महा कवच हवन

नृसिंह मंदिर, Haridwar

गुरु - 29 जन॰ 2026 - Guruvar Visesh

1.1k+ भक्त

पूजा करें

उत्सव ऑनलाइन पंचांग - आपका प्रमाणिक वैदिक कैलेंडर

उत्सव पंचांग एक परिष्कृत हिंदू कैलेंडर है जिसका उपयोग वैदिक समयपालन के लिए किया जाता है। यह केवल एक तिथि ट्रैकर नहीं है, बल्कि पंचांग एक विशेष खगोलीय गणना प्रणाली के रूप में कार्य करता है, जिसे दिन के चक्र के भीतर सबसे अनुकूल (शुभ) और प्रतिकूल (अशुभ) क्षणों को प्रकट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

संस्कृत शब्द ‘पंचांगम’ का अर्थ है ‘पाँच अंग’ (पंच = पाँच, अंग = भाग)। यह प्राचीन उपकरण ज्योतिषियों और आध्यात्मिक साधकों के लिए अत्यंत आवश्यक है, जो अपनी दैनिक गतिविधियों को ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ संरेखित करना चाहते हैं। सूर्य और चंद्रमा की स्थितियों को ट्रैक करके, पंचांग केवल सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त तक सीमित न रहते हुए उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण खगोलीय जानकारी प्रदान करता है।

भौगोलिक सटीकता: स्थान क्यों मायने रखता है

पंचांग पृथ्वी पर किसी विशिष्ट स्थान के सापेक्ष खगोलीय स्थितियों पर आधारित होकर कार्य करता है। परिणामस्वरूप, इसका विवरण केवल उसी भौगोलिक क्षेत्र के लिए सटीक होता है, जिसके लिए इसकी गणना की जाती है। उत्सव पंचांग आपके वर्तमान शहर के निर्देशांकों का उपयोग करके गतिशील रूप से उत्पन्न होता है, जिससे महत्वपूर्ण समयों के लिए उच्चतम सटीकता सुनिश्चित की जा सके। सभी ज्योतिषीय अवधियों की शुरुआत और समाप्ति सीधे स्थानीय क्षितिज और सौर चक्र से जुड़ी होती है।

पंचांग के पाँच आवश्यक अंग

दैनिक पंचांग का आधार पाँच मुख्य खगोलीय घटकों पर टिका होता है:

  • तिथि (Lunar Day): यह सूर्य और चंद्रमा के बीच कोणीय अंतर को मापती है। यह सभी हिंदू त्योहारों और उपवासों की तिथियाँ निर्धारित करने का प्राथमिक कारक है।
  • नक्षत्र (Star Constellation): यह राशि चक्र के 27 निश्चित नक्षत्रों में से किसी एक में चंद्रमा की स्थिति द्वारा निर्धारित किया जाता है। इसका उपयोग नामकरण जैसे संस्कारों और अनुकूलता के आकलन के लिए किया जाता है।
  • वार (Weekday): यह एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक की समयावधि होती है, जिस पर सात ग्रहों में से एक का शासन होता है।
  • योग (Union): सूर्य और चंद्रमा के संयुक्त देशांतर से उत्पन्न 27 योग होते हैं, जो दिन के समग्र स्वभाव और प्रभाव को दर्शाते हैं।
  • करण (Half-Tithi): यह एक तिथि का आधा भाग होता है। ग्यारह करणों में से विशेष रूप से विष्टि करण से बचने पर जोर दिया जाता है, जिसे नई शुरुआत के लिए अत्यंत अशुभ माना जाता है।
शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

पाँच प्रमुख पंचांग तत्वों को आकाशीय समयों के साथ जोड़कर निम्नलिखित विशिष्ट मुहूर्त निर्धारित किए जाते हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त: यह अत्यंत पवित्र समय भोर से पहले होता है और ध्यान, साधना तथा अध्ययन प्रारंभ करने के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
  • संध्या काल (प्रातः, मध्याह्न, सायाह्न): ये दिन के तीन निर्धारित काल होते हैं, जिनमें हिंदू धर्म के अनुयायी पारंपरिक रूप से अपनी दैनिक धार्मिक प्रार्थनाएँ और अनुष्ठान करते हैं।
  • अभिजीत मुहूर्त: यह दोपहर के आसपास का स्वाभाविक रूप से अनुकूल समय होता है। यदि कोई अन्य शुभ मुहूर्त उपलब्ध न हो, तो यह अवधि महत्वपूर्ण कार्य आरंभ करने के लिए एक शक्तिशाली विकल्प के रूप में कार्य करती है।
  • विजय मुहूर्त: यात्रा प्रारंभ करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाने वाला यह समय सफलता और उद्देश्य की प्राप्ति की संभावना को बढ़ाता है।
  • राहु काल: यह प्रत्येक दिन की एक विशिष्ट अशुभ अवधि होती है, जिसमें किसी भी नए या महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत से पूरी तरह बचना चाहिए।
  • संकल्प: किसी भी औपचारिक पूजा का एक अभिन्न अंग, जिसमें समय और स्थान को स्थापित करने हेतु पंचांग के पाँचों अंगों तथा प्रमुख ग्रह स्थितियों (विशेष रूप से सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति) का उच्चारण किया जाता है।

उत्सव पंचांग का दैनिक संदर्भ लेकर, आप नकारात्मक ग्रह प्रभावों को कम करते हुए तथा समृद्धि और आध्यात्मिक विकास के अवसरों को अधिकतम करते हुए अपने दिन की रणनीतिक योजना बना सकते हैं।

सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न