आज का पंचांग

उत्सव पंचांग - सटीक, प्रामाणिक और परंपरा में निहित

आज - 27 सित॰ 2026

सित॰

27

रवि

कृष्ण Paksha - प्रतिपदा

रविवार

panchang
flower

शुभ मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त

11:28 AM से 12:13 PM

अमृत काल

6:32 AM से 8:19 AM

ब्रह्म मुहूर्त

4:15 AM से 5:03 AM

flower

अशुभ मुहूर्त

राहु काल

10:20 AM से 11:50 AM

यमगंड

11:50 AM से 1:21 PM

गुलिका

2:52 PM से 4:23 PM

दुर्मुहूर्त

12:13 PM से 12:59 PM

वर्ज्यम

6:09 AM से 7:56 AM

flower

सूर्योदय

5:47 AM

सूर्यास्त

5:54 PM

चंद्रोदय

6:35 PM

चंद्रास्त

6:10 AM

तिथि

प्रतिपदा

26 सित॰ 2026 4:50 pm से 27 सित॰ 2026 3:28 pm

द्वितीया

27 सित॰ 2026 3:29 pm से 28 सित॰ 2026 1:43 pm

नक्षत्र

उत्तरा भाद्रपद

26 सित॰ 2026 6:03 am से 27 सित॰ 2026 5:37 am

रेवती

27 सित॰ 2026 5:38 am से 28 सित॰ 2026 4:45 am

कर्ण

बालव

26 सित॰ 2026 4:50 pm से 27 सित॰ 2026 4:11 am

कौलव

27 सित॰ 2026 4:12 am से 27 सित॰ 2026 3:28 pm

तैतिल

27 सित॰ 2026 3:29 pm से 28 सित॰ 2026 2:38 am

योग

वृद्धि

26 सित॰ 2026 7:48 am से 27 सित॰ 2026 5:45 am

ध्रुव

27 सित॰ 2026 5:46 am से 28 सित॰ 2026 3:22 am

आगामी त्योहार

सित॰

30

चतुर्थी श्राद्ध

"चतुर्थी तिथि प्रारम्भ - सायं 05:09, 29 सितम्बर, 2026 चतुर्थी तिथि समाप्त - अपराह्न 02:55, 30 सितम्बर, 2026" पूर्वजों के सम्मान और दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए किया जाने वाला एक श्राद्ध अनुष्ठान।

सित॰

30

विघ्नर���ज संकष्टी

"चतुर्थी तिथि प्रारम्भ - 29 सितम्बर, 2026 को शाम 05:09 बजे चतुर्थी तिथि समाप्त - 30 सितम्बर, 2026 को दोपहर 02:55 बजे" बाधाओं को दूर करने, ज्ञान प्राप्त करने और कठिनाइयों पर विजय पाने के लिए भगवान गणेश को समर्पित एक संकष्टी चतुर्थी।

अक्टू॰

03

Masik Kal Ashtami (Ashwin Mash Visesh)

"Begins - 07:59 AM, Oct 03 Ends - 05:51 AM, Oct 04" Observed on the Ashtami of Ashwin Krishna paksha, this day is dedicated to worshipping Kaal Bhairav, the fierce manifestation of Lord Shiva and the deity of esoteric arts. Devotees fast on this day to seek his protection, dispel negative energies, and overcome adversaries.

अक्टू॰

03

Jivitputrika Vrat

"Begins - 07:59 AM, Oct 03 Ends - 05:51 AM, Oct 04" Observed on Ashwin Krishna Ashtami, this is an extremely rigorous waterless fast kept by mothers. They pray to Lord Jimutavahana for the longevity, good health, and protection of their children. It holds immense cultural and religious significance primarily in Bihar, Jharkhand, and Uttar Pradesh.

अक्टू॰

03

Masik Janmashtami (Ashwin Mash Visesh)

"Begins - 07:59 AM, Oct 03 Ends - 05:51 AM, Oct 04" Observed monthly on the Krishna paksha Ashtami, this day is dedicated to Lord Krishna. On this specific date in the month of Ashwin, Bal Gopal is ritually bathed with milk and holy Ganges water. The fast is believed to bring the blessing of progeny, prosperity, and relief from life's sufferings.

अक्टू॰

05

दशमी श्राद्ध

दशमी तिथि प्रारम्भ - 03:53 सुबह, 05 अक्टूबर, 2026 दशमी तिथि समाप्त - 02:07 सुबह, 06 अक्टूबर, 2026 पितृ पक्ष में, अश्विन कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को उन पूर्वजों का तर्पण और श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु किसी भी वर्ष दशमी तिथि को हुई हो। इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराने और दान देने से दिवंगत आत्माओं को शांति और मोक्ष मिलता है।

अक्टू॰

06

Indira Ekadashi

"Ekadashi Tithi Begins - 02:07 AM on Oct 06, 2026 Ekadashi Tithi Ends - 12:34 AM on Oct 07, 2026" Falling on the eleventh day of Ashwin Krishna paksha, Indira Ekadashi holds profound significance due to its occurrence during Pitru Paksha. Observing a fast and worshipping Lord Vishnu on this day, while dedicating the merits to ancestors, helps liberate them from any sufferings in the afterlife.

अक्टू॰

08

Guru Pradosh Vrat

"Trayodashi Tithi Begins - 11:16 PM on Oct 07, 2026 Trayodashi Tithi Ends - 10:15 PM on Oct 08, 2026" When the Pradosh Vrat (Trayodashi tithi) falls on a Thursday, it is celebrated as Guru Pradosh. Dedicated to Lord Shiva, the alignment with Thursday strengthens the planet Jupiter in one's horoscope. It blesses the devotee with spiritual knowledge, wisdom, success, and victory over challenges.

अक्टू॰

09

Masik Shivratri (Ashwin Mash Visesh)

"Begins - 10:15 PM, Oct 08 Ends - 09:35 PM, Oct 09" Observed on the Chaturdashi of every Krishna paksha, the monthly Shivratri in the month of Ashwin features special four-prahar prayers dedicated to Lord Shiva and Goddess Parvati. Devotees who observe this fast find fulfillment of their wishes and enjoy a harmonious, blissful married life.

अक्टू॰

10

महालय अमावस्या

प्रारंभ - रात्रि 09:35, 09 अक्टूबर समाप्त - रात्रि 09:19, 10 अक्टूबर पितृ पक्ष के अंतिम दिन को चिह्नित करते हुए, महालय अमावस्या हिंदू महीने का कृष्ण पक्ष का दिन है। यह उन सभी ज्ञात और अज्ञात पूर्वजों के लिए श्राद्ध और तर्पण करने हेतु समर्पित है, जिनकी पुण्यतिथि ज्ञात नहीं है। इसके ठीक अगले दिन से शारदीय नवरात्रि का भव्य शुभारंभ होता है।


आगामी पूजा

11000 चंद्र मूल मंत्र जाप सहित दूध अभिषेक - Utsav Puja

भावनात्मक उपचार और मानसिक शांति के लिए पूजा

11000 चंद्र मूल मंत्र जाप सहित दूध अभिषेक

सोमेश्वर महादेव, Prayagraj

सोम - 28 सित॰ 2026 - सोमवार विशेष

1.1k+ भक्त

पूजा करें
2,50,000 महा मृत्युंजय मंत्र जाप अनुष्ठान - Utsav Puja

किसी भी रोग को नष्ट करने, अच्छे स्वास्थ्य को बहाल करने और दुर्घटनाओं से बचने के लिए पूजा।

2,50,000 महा मृत्युंजय मंत्र जाप अनुष्ठान

मृत्युंजय महादेव, Varanasi

सोम - 28 सित॰ 2026 - सोमवार विशेष

3.7k+ भक्त

पूजा करें
Somvar Visesh Kada Dham Sheetala Mata Weekly Jhadu Chadhawa - Utsav Puja

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Somvar Visesh Kada Dham Sheetala Mata Weekly Jhadu Chadhawa

Kada Dham Shaktipith, Kade

सोम - 28 सित॰ 2026 - सोमवार विशेष

1.0k+ भक्त

पूजा करें
Somvar Visesh Maa Kamakhya Weekly Rakta Chandan Seva - Utsav Puja

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Somvar Visesh Maa Kamakhya Weekly Rakta Chandan Seva

Shri Kamakhya Mandir, Sultanpur

सोम - 28 सित॰ 2026 - सोमवार विशेष

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पूजा करें
Somvar  Visesh Maa Kamakhya Weekly Rakta Shringar Daan Seva - Utsav Puja

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Somvar Visesh Maa Kamakhya Weekly Rakta Shringar Daan Seva

Shri Kamakhya Mandir, Sultanpur

सोम - 28 सित॰ 2026 - सोमवार विशेष

1.8k+ भक्त

पूजा करें
गणेश चतुर्थी विशेष सौभाग्य लम्बोदर गणपति साप्ताहिक गजानन स्तोत्र पाठ और चांदी का सिक्का अर्पण - Utsav Puja

7 सप्ताह दान अनुशंसित

गणेश चतुर्थी विशेष सौभाग्य लम्बोदर गणपति साप्ताहिक गजानन स्तोत्र पाठ और चांदी का सिक्का अर्पण

Saubhagya Ganpati Mandir, Prayagraj

सोम - 28 सित॰ 2026 - सोमवार विशेष

1.0k+ भक्त

पूजा करें
घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग पंचामृत अभिषेक महा पूजा - Utsav Puja

करियर में वृद्धि, धन और दीर्घकालिक सफलता के लिए पूजा।

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग पंचामृत अभिषेक महा पूजा

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग, Ghrishneshwar

सोम - 28 सित॰ 2026 - सोमवार विशेष

10.7k+ भक्त

पूजा करें
घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग साप्ताहिक दान सेवा - Utsav Puja

समृद्धि और सुख-शांति के लिए पूजा

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग साप्ताहिक दान सेवा

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग, Ghrishneshwar

सोम - 28 सित॰ 2026 - सोमवार विशेष

3.8k+ भक्त

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त्रियुगीनारायण कार्मिक संबंध पुनर्मिलन महापूजा - Utsav Puja

🔴 समय पर, सुखी विवाह के लिए — त्रियुगीनारायण में आशीर्वाद, वह मंदिर जहाँ शिव और पार्वती का विवाह हुआ था।

त्रियुगीनारायण कार्मिक संबंध पुनर्मिलन महापूजा

श्री त्रियुगीनारायण मंदिर, Rudraprayag

सोम - 28 सित॰ 2026 - सोमवार विशेष

2.0k+ भक्त

पूजा करें
त्रियुगीनारायण साप्ताहिक गुलाब दान सेवा - Utsav Puja

16 सप्ताह दान अनुशंसित

त्रियुगीनारायण साप्ताहिक गुलाब दान सेवा

श्री त्रियुगीनारायण मंदिर, Rudraprayag

सोम - 28 सित॰ 2026 - सोमवार विशेष

2.6k+ भक्त

पूजा करें

उत्सव ऑनलाइन पंचांग - आपका प्रमाणिक वैदिक कैलेंडर

उत्सव पंचांग एक परिष्कृत हिंदू कैलेंडर है जिसका उपयोग वैदिक समयपालन के लिए किया जाता है। यह केवल एक तिथि ट्रैकर नहीं है, बल्कि पंचांग एक विशेष खगोलीय गणना प्रणाली के रूप में कार्य करता है, जिसे दिन के चक्र के भीतर सबसे अनुकूल (शुभ) और प्रतिकूल (अशुभ) क्षणों को प्रकट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

संस्कृत शब्द ‘पंचांगम’ का अर्थ है ‘पाँच अंग’ (पंच = पाँच, अंग = भाग)। यह प्राचीन उपकरण ज्योतिषियों और आध्यात्मिक साधकों के लिए अत्यंत आवश्यक है, जो अपनी दैनिक गतिविधियों को ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ संरेखित करना चाहते हैं। सूर्य और चंद्रमा की स्थितियों को ट्रैक करके, पंचांग केवल सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त तक सीमित न रहते हुए उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण खगोलीय जानकारी प्रदान करता है।

भौगोलिक सटीकता: स्थान क्यों मायने रखता है

पंचांग पृथ्वी पर किसी विशिष्ट स्थान के सापेक्ष खगोलीय स्थितियों पर आधारित होकर कार्य करता है। परिणामस्वरूप, इसका विवरण केवल उसी भौगोलिक क्षेत्र के लिए सटीक होता है, जिसके लिए इसकी गणना की जाती है। उत्सव पंचांग आपके वर्तमान शहर के निर्देशांकों का उपयोग करके गतिशील रूप से उत्पन्न होता है, जिससे महत्वपूर्ण समयों के लिए उच्चतम सटीकता सुनिश्चित की जा सके। सभी ज्योतिषीय अवधियों की शुरुआत और समाप्ति सीधे स्थानीय क्षितिज और सौर चक्र से जुड़ी होती है।

पंचांग के पाँच आवश्यक अंग

दैनिक पंचांग का आधार पाँच मुख्य खगोलीय घटकों पर टिका होता है:

  • तिथि (Lunar Day): यह सूर्य और चंद्रमा के बीच कोणीय अंतर को मापती है। यह सभी हिंदू त्योहारों और उपवासों की तिथियाँ निर्धारित करने का प्राथमिक कारक है।
  • नक्षत्र (Star Constellation): यह राशि चक्र के 27 निश्चित नक्षत्रों में से किसी एक में चंद्रमा की स्थिति द्वारा निर्धारित किया जाता है। इसका उपयोग नामकरण जैसे संस्कारों और अनुकूलता के आकलन के लिए किया जाता है।
  • वार (Weekday): यह एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक की समयावधि होती है, जिस पर सात ग्रहों में से एक का शासन होता है।
  • योग (Union): सूर्य और चंद्रमा के संयुक्त देशांतर से उत्पन्न 27 योग होते हैं, जो दिन के समग्र स्वभाव और प्रभाव को दर्शाते हैं।
  • करण (Half-Tithi): यह एक तिथि का आधा भाग होता है। ग्यारह करणों में से विशेष रूप से विष्टि करण से बचने पर जोर दिया जाता है, जिसे नई शुरुआत के लिए अत्यंत अशुभ माना जाता है।
शुभ एवं अशुभ मुहूर्त

पाँच प्रमुख पंचांग तत्वों को आकाशीय समयों के साथ जोड़कर निम्नलिखित विशिष्ट मुहूर्त निर्धारित किए जाते हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त: यह अत्यंत पवित्र समय भोर से पहले होता है और ध्यान, साधना तथा अध्ययन प्रारंभ करने के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
  • संध्या काल (प्रातः, मध्याह्न, सायाह्न): ये दिन के तीन निर्धारित काल होते हैं, जिनमें हिंदू धर्म के अनुयायी पारंपरिक रूप से अपनी दैनिक धार्मिक प्रार्थनाएँ और अनुष्ठान करते हैं।
  • अभिजीत मुहूर्त: यह दोपहर के आसपास का स्वाभाविक रूप से अनुकूल समय होता है। यदि कोई अन्य शुभ मुहूर्त उपलब्ध न हो, तो यह अवधि महत्वपूर्ण कार्य आरंभ करने के लिए एक शक्तिशाली विकल्प के रूप में कार्य करती है।
  • विजय मुहूर्त: यात्रा प्रारंभ करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाने वाला यह समय सफलता और उद्देश्य की प्राप्ति की संभावना को बढ़ाता है।
  • राहु काल: यह प्रत्येक दिन की एक विशिष्ट अशुभ अवधि होती है, जिसमें किसी भी नए या महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत से पूरी तरह बचना चाहिए।
  • संकल्प: किसी भी औपचारिक पूजा का एक अभिन्न अंग, जिसमें समय और स्थान को स्थापित करने हेतु पंचांग के पाँचों अंगों तथा प्रमुख ग्रह स्थितियों (विशेष रूप से सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति) का उच्चारण किया जाता है।

उत्सव पंचांग का दैनिक संदर्भ लेकर, आप नकारात्मक ग्रह प्रभावों को कम करते हुए तथा समृद्धि और आध्यात्मिक विकास के अवसरों को अधिकतम करते हुए अपने दिन की रणनीतिक योजना बना सकते हैं।

सामान्य पूछे जाने वाले प्रश्न